पटना , फरवरी 05 -- बिहार में उच्च शिक्षा और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने की दिशा में भागलपुर में कृषि जैव प्रौद्योगिकी महाविद्यालय , सबौर के आधारभूत संरचना का निर्माण किया जा रहा है।
भवन निर्माण विभाग की ओर से इस परियोजना का कार्य तीव्र गति से आगे बढ़ रहा है। परिसर में परिसर में शैक्षणिक एवं प्रशासनिक भवन (जी 3) सहित विभिन्न आवासीय भवनों का निर्माण कार्य प्रगति पर है। भवनों का निर्माण तेजी से किया जा रहा है, जिससे शैक्षणिक, प्रशासनिक, छात्रावास एवं आवासीय सुविधाएं उपलब्ध हो सकें।कॉलेज के शैक्षणिक और प्रशासनिक कार्यों के लिए अलग से जी प्लस तीन मंजिला अकादमिक एवं प्रशासनिक भवन का निर्माण हो रहा है।
परियोजना के अंतर्गत छात्रों के लिए अत्याधुनिक सुविधाओं से युक्त बॉयज हॉस्टल और गर्ल्स हॉस्टल का निर्माण किया जा रहा है। बॉयज हॉस्टल की इमारत जी प्लस तीन मंजिला होगी, जबकि गर्ल्स हॉस्टल में ग्राउंड फ्लोर के साथ तीन मंजिलों का निर्माण चल रहा है। दोनों हॉस्टलों का उद्देश्य छात्रों को सुरक्षित और सुविधाजनक आवास उपलब्ध कराना है।
कॉलेज परिसर में आवासीय सुविधाओं के तहत एक टाइप सिक्स आवासीय भवन का भी निर्माण किया जा रहा है, जो जी प्लस दो मंजिला होगा। इस भवन के प्रथम तल का ब्रिक वर्क कार्य जारी है। इसके अतिरिक्त टाइप फाइव श्रेणी की आवासीय इमारतों का निर्माण भी किया जा रहा है।
प्रथम ब्लॉक में टाइप फाइव की जी प्लस दो मंजिला इमारत निर्माणाधीन है, जबकि द्वितीय ब्लॉक में भी इसी प्रकार की जी प्लस दो आवासीय इमारत बनाई जाएगी।इसके अलावा प्रथम ब्लॉक में टाइप थ्री की जी प्लस दो आवासीय इमारत का निर्माण किया जाएगा और द्वितीय ब्लॉक में भी टाइप थ्री श्रेणी की जी प्लस दो मंजिला इमारत का निर्माण होना है।
भवन विभाग के सचिव कुमार रवि ने कहा कि कृषि जैव प्रौद्योगिकी महाविद्यालय, साबौर के निर्माण कार्यों में अच्छी प्रगति हो रही है। उन्होंने कहा कि यह परियोजना बिहार में जैव प्रौद्योगिकी एवं कृषि शिक्षा को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगी। भवनों के निर्माण समयबद्ध एवं गुणवत्ता के साथ पूर्ण होंगे और इसके लिए लगातार स्थल निरीक्षण एवं अनुश्रवण किया जा रहा है। यह परियोजना राज्य के कृषि विकास एवं युवा सशक्तिकरण में महत्वपूर्ण योगदान देगी।
श्री रवि ने कहा कि कृषि जैव प्रौद्योगिकी महाविद्यालय, सबौर के आधारभूत संरचना के बन जाने से न केवल उच्च शिक्षा को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि पर्यावरण, जैव विविधता और अनुसंधान के क्षेत्र में भी नए अवसर सृजित होंगे।
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