नयी दिल्ली , अप्रैल 17 -- भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) ने लोकसभा में महिला आरक्षण से जुड़े संविधान संशोधन विधेयक को दो-तिहाई बहुमत न मिलने को मोदी सरकार के लिए बड़ा राजनीतिक झटका बताया है।
भाकपा ने शुक्रवार को शुक्रवार को कहा कि यह परिणाम देश में प्रतिनिधित्व के संतुलन को बदलने की किसी भी कोशिश के खिलाफ मजबूत विरोध को दर्शाता है। पार्टी के राज्यसभा सांसद पी संदोष कुमार ने कहा कि महिलाओं के आरक्षण से जुड़ा कानून वर्ष 2023 में संसद द्वारा सर्वसम्मति से पारित किया गया था और इसका उनकी पार्टी ने भी समर्थन किया था। उन्होंने कहा कि यह भाकपा की लंबे समय से चली आ रही मांग रही है, जिसे कॉमरेड गीता मुखर्जी लगातार उठाती रही थीं। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार ने महिला आरक्षण को परिसीमन से जोड़कर इसके क्रियान्वयन को टालने की कोशिश की है। यह महिलाओं के प्रतिनिधित्व के प्रति सरकार की गंभीरता की कमी को दिखाता है और साथ ही देश के संघीय ढांचे को कमजोर करने का प्रयास भी है।
श्री कुमार ने कहा कि यह स्थिति किसानों के आंदोलन जैसी है, जब लोगों की एकजुटता के कारण सरकार को कृषि कानून वापस लेने पड़े थे। उन्होंने कहा कि यह घटनाक्रम लोकतंत्र, संघवाद और सामाजिक न्याय की रक्षा के लिए लोगों को एकजुट करेगा और सरकार के खिलाफ संघर्ष को मजबूत बनायेगा।
गौरतलब है कि लोकसभा में सरकार संविधान संशोधन विधेयक के पक्ष में दो तिहाई बहुमत नहीं जुटा पायी, जिसके कारण यह विधेयक पारित नहीं हो पाया।
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