भरतपुर , मार्च 13 -- राजस्थान में भरतपुर सम्भाग में घरेलू एवं व्यावसायिक गैस सिलेंडरों की आपूर्ति और कालाबाजारी रोकने के लिए प्रशासन के तमाम तरह के प्रयासों और सख्त आदेश के बावजूद हालात विस्फोटक होते जा रहे हैं।

प्राप्त जानकारी के अनुसार खाली पड़े गैस गोदामों के बीच उपभोक्ताओं के बढ़ते दबाव को देखते गैस एजेंसियों पर ताले लटके नजर आने लगे है। जो एजेंसियां खुली हुई भी हैं वहां उमड़ते हुजूम के आगे कर्मचारियों की बेबसी साफ नजर आ रही है।

व्यावसायिक सिलेंडरों की करीब बंद हो चुकी आपूर्ति की वजह से भरतपुर, डीग, करोली, धौलपुर एवं सवाईमाधोपुर में रेस्टोरेंट्स और होटल उद्योग के साथ चाय- कॉफी बनाने वाले थड़ी-ठेलों पर भी असर पड़ा है। सम्भाग में बड़ी संख्या में दुकानदारों ने अपने रेस्टोरेंट्स को अस्थाई तौर पर बंद कर दिया है। जबकि कुछ लोग लकड़ी और कोयले की भट्टियों से अपना काम चला रहे हैं। लकड़ी एवं कोयले की भट्टियों के उपयोग के कारण खाने के दामों में भी बढ़ोत्तरी होने लगी है। बताया जा रहा है रसोई गैस की किल्लत को देखते उपलों एवं कोयले की कीमतें भी करीब दो गुनी हो गई हैं।

सूत्रों ने बताया कि इस बीच प्रशासनिक स्तर पर अधिकारियों की देखरेख में कार्य बल के गठन के साथ नियंत्रण कक्षों की स्थापना का घरेलू गैस की कालाबाजारी करने वालों पर कोई असर नजर नहीं आ रहा। घरेलू सिलेंडर दो हजार रुपए में आसानी से उपलब्ध हैं तो व्यावसायिक गैस सिलेंडर की कीमत साढ़े तीन हजार से लेकर चार हजार तक जा पहुंची है।

सम्भाग में चार दिन पहले तक बुक करवाये गए गैस सिलेंडर के बारे में गैस एजेंसी के कर्मचारी कोई सही जवाब देने के लिए तैयार नहीं हैं। सिलेंडर लेने के लिए कई कई घंटे के इंतजार के बाद भी लोगों को मायूस लौटना पड़ रहा है।

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