जयपुर , दिसंबर 16 -- राजस्थान में नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने प्रदेश की भजनलाल सरकार के दो साल के कार्यकाल को पूरी तरह विफल बताते हुए हुए उसके द्वारा इस दौरान 72 प्रतिशत वादे पूरे करने के दावे को जनता के साथ धोखा करार दिया है।

श्री जूली ने यहां एक प्रेस वार्ता में कहा कि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा दो साल बाद पहली बार प्रेस वार्ता कर रहे हैं, जो यह दर्शाता है कि वह मीडिया और जनता के प्रति कितने गंभीर हैं। सरकार का यह दावा कि उसने 'संकल्प पत्र' के 72 प्रतिशत वादे पूरे कर दिए हैं। 72 प्रतिशत पूरा नहीं, बल्कि प्रदेश की जनता के साथ 72 प्रतिशत का धोखा है। उन्होंने मुख्यमंत्री के हाल में दिए बयान पर पलटवार करते हुए कहा "मुख्यमंत्रीजी, मुझे जगह, समय और दिन बता दें, मैं जहां भी बुलाएंगे 'डिबेट' में आने को तैयार हूँ।"श्री जूली ने कहा कि संकल्प पत्र के 10 प्रमुख वादों की हकीकत यह है कि जिसमें किसान सम्मान निधि: घोषणा पत्र में 12 हजार रुपए करने का वादा किया गया था, बिना किसी 'चरणबद्ध' शर्त के, लेकिन सरकार ने केवल नौ हजार रुपए दिए। यह वादाखिलाफी है। इसी तरह जल जीवन मिशन 2025 तक हर घर जल का वादा फेल हो चुका है। दिसंबर 2025 की समय सीमा सिर पर है और 34 लाख घर अभी भी प्यासे हैं। इस साल 20 लाख के लक्ष्य के मुकाबले आठ महीने में मात्र 1.66 लाख कनेक्शन दिए गए हैं।

उन्होंने कह कि इसी तरह न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर खरीद: मूंग, उड़द और मूंगफली की खरीद के वादे हवा हो गए। किसान टोकन के लिए तरस रहे हैं और 'फर्जी गिरदावरी' के जरिए व्यापारियों को फायदा पहुंचाया जा रहा है। गेंहू पर 2700 रुपए और बाजरे की एमएसपी का वादा भी अधूरा है। स्थानांतरण नीति पारदर्शी नीति के बजाय प्रदेश में 'तबादला उद्योग' खुल गया है। आठ लाख कर्मचारी ठगे गए हैं और आरएसएस की लिस्ट एवं राजनीतिक द्वेष के आधार पर तबादले हो रहे हैं।

श्री जूली ने कहा कि स्कूल ड्रेस योजना में 1200 रुपए के वादे के मुकाबले केवल 600 रु दिए जा रहे हैं। इसमें भी जनरल, ओबीसी और ईडब्ल्यूएस वर्ग के गरीब बच्चों को बाहर कर सरकार ने भेदभाव किया है। पशुधन बीमा योजना वेंटिलेटर पर है जबकि कांग्रेस शासन में 80 लाख पशु पंजीकृत थे, अब गिरकर 20 लाख रह गए हैं। 90 प्रतिशत से अधिक दावे खारिज किए जा रहे हैं।

उन्होंने कहा कि इसी तरह सरकारी नौकरियां के वादे में एक साल में सभी रिक्त पद भरने का वादा किया गया था लेकिन शिक्षा विभाग में ही 1.25 लाख पद खाली पड़े हैं। शिक्षा संस्थान (रिट एवं रिम्स): हर संभाग में आईआईटी एवं एम्स की तर्ज पर संस्थान खोलने का वादा किया गया था लेकिन पुराने संस्थानों के नाम बदलने के अलावा एक भी नया संस्थान नहीं खोला गया। जमीन नीलामी रोकने के लिए कोई कानून नहीं लाया गया। कांग्रेस सरकार के 'कृषि रिण राहत आयोग' को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया। पेट्रोल- डीजल: वैट कम कर गुजरात-हरियाणा के बराबर दाम करने का वादा पूरा नहीं हुआ, जनता आज भी महंगा तेल खरीद रही है।

उन्होंने कहा कि सरकार 'कर्ज लो और घी पियो' की नीति पर चल रही हैऔर दो साल में 1.55 लाख करोड़ का कर्ज बढ़ा है। हर राजस्थानी पर अब एक लाख रुपये का कर्ज है। विकास से ज्यादा ब्याज पर खर्च हो रहा है जो बेहद चिंताजनक है कि सरकार ने विकास कार्यों पर केवल 15,397 करोड़ रुपये खर्च किए, जबकि उससे कहीं ज्यादा 19676 करोड़ रुपये केवल ब्याज चुकाने में खर्च कर दिए। प्रदेश का विकास ठप है।

उन्होंने कहा कि डबल इंजन फेल हो गया और केंद्र से 39 हजार 193 करोड़ रुपए मिलने की उम्मीद थी लेकिन केवल 7171 करोड़ रुपए ही मिले । उन्होंने कहा कि 2717 बजट घोषणाओं में से मात्र 754 (27 प्रतिशत ) पूरी हुई हैं जबकि दावे 72 प्रतिशत पूरी करने के किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि 72 से अधिक घोषणाएं या तो अधूरी हैं या उन पर काम ही शुरू नहीं हुआ।

श्री जूली ने उच्चतम न्यायालय में केंद्र सरकार द्वारा स्वीकार की गई अरावली की नयी परिभाषा (100 मीटर से कम ऊंचाई वाली पहाड़ी अरावली नहीं) का जिक्र करते हुए कहा कि यह फैसला राजस्थान को रेगिस्तान बनाने का षड्यंत्र है, जिसका कांग्रेस पुरजोर विरोध करेगी।

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