भीलवाड़ा , जनवरी 25 -- केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत ने कहा है कि भगवान देवनारायण केवल गुर्जर समाज के आराध्य देव नहीं, अपितु धर्म, न्याय, करुणा और लोकमंगल के जीवंत प्रतीक हैं और उनका अवतरण ऐसे समय में हुआ, जब समाज को अन्याय और शोषण के विरुद्ध संघर्ष तथा धर्म के मार्ग पर अडिग रहने की प्रेरणा की आवश्यकता थी।

श्री शेखावत रविवार को मालासेरी में भगवान देवनारायण के 1114वें अवतरण अमृत महोत्सव में बोल रहे थे। उन्होंने मालासेरी तीर्थ कॉरिडोर के प्रगतिशील कार्यों का अवलोकन किया। साथ ही मालासेरी डूंगरी में चल रहे साप्ताहिक विष्णु महायज्ञ की पूर्णाहुति कार्यक्रम में भी शामिल हुए। उन्होंने कहा कि भगवान देवनारायण ने सत्ता या वैभव की नहीं, अपितु धर्म की पुनर्स्थापना, सामाजिक न्याय और जनकल्याण की साधना की। इसी कारण वे केवल लोकदेवता नहीं, अपितु पीढ़ी दर पीढ़ी समाज को दिशा देने वाले लोक संस्कार बने।

उन्होंने कहा कि 1114 वर्ष बाद भी उनकी गाथाएं राजस्थान सहित कई राज्यों में लोकगीतों, फड़ वाचन और परंपराओं के माध्यम से जीवंत हैं, जो भारत की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत की अद्भुत शक्ति को दर्शाता है। श्री शेखावत ने कहा कि भारतवासी होने के नाते हमें अपने हजारों वर्षों पुराने इतिहास, सभ्यता और संस्कृति पर गर्व है।

उन्होंने बताया कि दुनिया की कई सभ्यताएं समय के साथ स्वयं को ढाल नहीं सकीं और इतिहास में विलीन हो गईं जबकि भारत हर चुनौती के बावजूद अडिग रहा। भारत को भौगोलिक, सांस्कृतिक और वैचारिक रूप से विभाजित करने के अनेक प्रयास हुए लेकिन कोई भी शक्ति इसे समाप्त नहीं कर सकी, क्योंकि भारत केवल एक भूभाग नहीं, अपितु सभ्यता, संस्कृति, सद्भाव और अनंत संभावनाओं की जीवंत पहचान है। इसी आत्मबल के सहारे आज भारत अपने उज्ज्वल भविष्य की मजबूत नींव रख रहा है।

उन्होंने कहा कि भारत की दीर्घ यात्रा में समाजशक्ति की भूमिका निर्णायक रही है। हर युग में समाज के भीतर से उठी चेतना ने अंधकार को दूर किया और जनकल्याण का मार्ग प्रशस्त किया।

श्री शेखावत ने कहा कि भारत में धर्म केवल आस्था तक सीमित नहीं अपितु संस्कृति, पहचान, पर्यटन और रोजगार का सशक्त माध्यम भी है। इसी दृष्टि से केंद्र सरकार धार्मिक एवं सांस्कृतिक स्थलों के समग्र विकास को प्राथमिकता दे रही है। प्रसाद योजना के तहत तीर्थस्थलों पर बुनियादी सुविधाओं का विकास किया जा रहा है, जबकि स्वदेश दर्शन योजना के तहत रामायण, कृष्ण आदिवासी जैसे थीम आधारित पर्यटन सर्किट विकसित किए गए हैं, जिससे स्थानीय युवाओं को रोजगार के अवसर मिले हैं।

उन्होंने बताया कि स्वदेश दर्शन 2.0-प्रसाद योजना के तहत मालासेरी डूंगरी सहित साडू माता की बावड़ी, सवाईभोज मंदिर, गढ़गोठा और बरननगर को जोड़ते हुए 48.73 करोड़ रुपये की लागत से धार्मिक-पर्यटन कॉरिडोर विकसित किया जा रहा है। इसमें बेहतर सड़क संपर्क, पार्किंग, सभास्थल, प्रवेश द्वार, भोजनालय और आधुनिक सुविधाएं शामिल हैं।

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