चंडीगढ़ , दिसंबर 29 -- पंजाब भारतीय जनता पार्टी अनुसूचित जाति मोर्चा के उपाध्यक्ष परमजीत सिंह कैंथ ने सोमवार को मांग की कि मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान पिछले 10 वर्षों में पंजाब में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी (मनरेगा) कार्यक्रम के कार्यान्वयन में कथित अनियमितताओं पर एक श्वेत पत्र जारी करें।
श्री कैंथ ने कहा कि मुख्यमंत्री इन अनियमितताओं की समयबद्ध उच्च स्तरीय जांच का आदेश दें, जिसमें स्पष्ट वसूली और जहां भी गड़बड़ी पायी जाये, वहां अभियोजन का प्रावधान हो। उन्होंने कहा कि यदि राज्य सरकार अपने शासन के रिकॉर्ड को लेकर आश्वस्त है, तो उसे सत्यापन योग्य तथ्यों को सार्वजनिक करना चाहिए, जिसमें जारी किये गये जॉब कार्ड, पंजीकृत मांग, प्रदान किये गये रोजगार, हाज़िरी सूची, कार्य माप, सामग्री खरीद, भुगतान और सामाजिक लेखापरीक्षा अनुपालन शामिल हैं। उन्होंने कहा कि श्वेत पत्र जवाबदेही का न्यूनतम मानक है और इससे नागरिकों को यह आकलन करने में मदद मिलेगी कि क्या धनराशि वास्तविक लाभार्थियों तक पहुंची है और क्या निर्मित संपत्ति टिकाऊ और उपयोगी है।
उन्होंने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में मिली शिकायतों और ऑडिट टिप्पणियों से बार-बार सामने आने वाले जोखिम पैटर्न का पता चलता है, जिनकी गहन जांच आवश्यक है। इनमें फर्जी या डुप्लीकेट जॉब कार्ड, जाली या अविश्वसनीय दस्तावेजों के आधार पर भुगतान, हाजिरी सूची में हेरफेर और बिना काम के भुगतान, टिकाऊ परिणाम के बिना कार्यों को पूर्ण दिखाना और अपात्र या मृत व्यक्तियों को लाभार्थी के रूप में शामिल करना शामिल हैं। उन्होंने कहा कि श्वेत पत्र में शुरू की गई विभागीय जांचों, दर्ज की गई एफआईआर, की गई वसूली, अधिकारियों और पंचायत पदाधिकारियों के खिलाफ की गयी कार्यवाही और पुनरावृत्ति को रोकने के लिए अपनाए गए सुधारात्मक उपायों की स्थिति का भी खुलासा किया जाना चाहिए।
श्री कैंथ ने विधानसभा का विशेष सत्र बुलाने के फैसले की आलोचना करते हुए कहा कि इससे ग्रामीण विकास, कार्यक्रमों की अखंडता और कार्यान्वयन परिणामों से संबंधित शासन प्राथमिकताओं से ध्यान नहीं भटकना चाहिए। उन्होंने कहा कि जनहित में मनरेगा के पिछले कार्यान्वयन में पारदर्शिता और वीबी-जी आरएएम जी ढांचे में परिवर्तन के लिए विश्वसनीय तैयारी आवश्यक है, जिसमें समय पर मजदूरी भुगतान, बिना किसी भेदभाव के समावेशन और टिकाऊ संपत्तियों के निर्माण को सुनिश्चित करने वाले नियंत्रण शामिल हैं, जिससे ग्रामीण जीवन स्तर में स्पष्ट सुधार हो सके। उन्होंने विकसित भारत - रोजगार एवं आजीविका मिशन (ग्रामीण) (वीबी जी राम जी) अधिनियम, 2025 के लागू होने का स्वागत करते हुए इसे ग्रामीण रोजगार वितरण को आधुनिक बनाने और इसे टिकाऊ ग्रामीण अवसंरचना निर्माण से सीधे जोड़ने के उद्देश्य से बनाया गया एक महत्वपूर्ण सुधार ढांचा बताया।
उन्होंने कहा कि यह कार्यक्रम ग्रामीण आजीविका और अवसंरचना संबंधी सबसे बड़े हस्तक्षेपों में से एक है और इसे स्पष्ट सेवा मानकों और कड़ी जवाबदेही के साथ लागू किया जाना चाहिए, विशेष रूप से उन राज्यों में जहां सत्यनिष्ठा संबंधी चिंताएं उठाई गई हैं। उन्होंने कहा कि यह अधिनियम प्रति वित्तीय वर्ष प्रत्येक ग्रामीण परिवार के लिए 125 दिनों के वेतनभोगी रोजगार की वैधानिक गारंटी बढ़ाकर और साप्ताहिक वेतन भुगतान की अनिवार्यता के माध्यम से भुगतान अनुशासन को सख्त करके आजीविका सुरक्षा को मजबूत करता है।
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