ऋषिकेश , अप्रैल 08 -- भगवान बदरी विशाल के कपाट खुलने की सदियों पुरानी परंपरा का उल्लास बुधवार को उत्तराखंड की तीर्थनगरी ऋषिकेश में चरम पर देखने को मिला। नरेंद्रनगर राजदरबार से शुरू हुई पावन गाडू घड़ा (तेल कलश) यात्रा बुधवार को ऋषिकेश पहुंची, जहां श्रद्धालुओं ने भक्ति और उत्साह के साथ इसका स्वागत किया।
इस वर्ष यात्रा में एक ऐतिहासिक बदलाव भी देखने को मिला। दशकों पुरानी परंपरा के अनुसार चेला चेतराम धर्मशाला पहुंचने के बजाय, गाडू घड़ा यात्रा पहली बार बनखंडी स्थित रामलीला ग्राउंड पहुंची। सुबह से ही बनखंडी क्षेत्र में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। जैसे ही चांदी का पवित्र कलश रामलीला ग्राउंड पहुंचा, पूरा क्षेत्र "बद्री विशाल लाल की जय" के जयघोष से गूंज उठा।
हजारों श्रद्धालुओं ने कतारबद्ध होकर गाडू घड़ा के दर्शन किए और पुण्य अर्जित किया। इस दौरान स्थानीय नागरिकों के साथ देश-विदेश से आए तीर्थयात्री एवं क्षेत्रीय जनप्रतिनिधि भी मौजूद रहे। पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत और शंकराचार्य अवीमुक्तेश्वरानंद ने भी यात्रा में सहभागिता कर आस्था व्यक्त की।
कार्यक्रम के पश्चात सायंकाल गाडू घड़ा यात्रा शत्रुघ्न मंदिर, मुनिकीरेती के लिए रवाना होगी। यहां से विभिन्न पड़ावों और पर्वतीय मार्गों से होते हुए यह पावन यात्रा बदरीनाथ धाम पहुंचेगी।
गौरतलब है कि बदरीनाथ धाम के कपाट खुलने से पूर्व राजमहल की सुहागिन महिलाएं पारंपरिक रीति-रिवाजों के तहत तिल का तेल निकालती हैं। इसी पवित्र तेल को चांदी के कलश 'गाडू घड़ा' में भरकर धाम ले जाया जाता है, जिससे भगवान बदरीनाथ का अभिषेक किया जाता है। यह परंपरा उत्तराखंड की समृद्ध संस्कृति और अटूट आस्था का जीवंत प्रतीक मानी जाती है।
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