लखनऊ , दिसम्बर 28 -- उत्तर प्रदेश में बौद्ध सर्किट आस्था, विश्वास और वैश्विक पर्यटन का सशक्त केंद्र बनकर उभर रहा है। जनवरी से सितंबर 2025 के बीच प्रदेश के प्रमुख बौद्ध स्थलों पर 61,15,850 पर्यटकों का आगमन दर्ज किया गया है। जिनमें 58,44,591 घरेलू और 2,71,259 विदेशी पर्यटक शामिल हैं। यह उपलब्धि उत्तर प्रदेश को वैश्विक बौद्ध पर्यटन मानचित्र पर नई पहचान दिला रही है।
पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उत्तर प्रदेश के बौद्ध सर्किट को लेकर रुचि तेजी से बढ़ी है। उन्होंने कहा कि विभाग का अनुमान है कि वर्ष 2025 के अंत तक इन पवित्र स्थलों पर आने वाले पर्यटकों की संख्या 64 लाख के पार पहुंच जाएगी। यह वृद्धि प्रदेश में बौद्ध विरासत की अंतरराष्ट्रीय स्वीकार्यता और पर्यटन सुविधाओं के सुदृढ़ीकरण का प्रमाण है।
आंकड़ों के अनुसार, महापरिनिर्वाण स्थली कुशीनगर में सर्वाधिक 18,60,507 पर्यटक पहुंचे, जिनमें 1,88,131 विदेशी सैलानी शामिल रहे। भगवान बुद्ध के प्रथम उपदेश स्थल सारनाथ में 17,75,489 पर्यटकों ने भ्रमण किया, जिनमें 64,821 विदेशी पर्यटक थे। कपिलवस्तु में 51,795 पर्यटक पहुंचे, जिनमें 15,423 विदेशी शामिल रहे। श्रावस्ती में 79,245 तथा संकिसा में 29,577 पर्यटकों का आगमन दर्ज किया गया।
विशेष रूप से कौशांबी जिला ऐतिहासिक, धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है। वर्ष 2025 के जनवरी से सितंबर के बीच यहां 23,19,237 पर्यटकों का आगमन हुआ, जिनमें 2,884 विदेशी पर्यटक शामिल थे। यह स्थल भगवान बुद्ध के छठे और नौवें वर्षावास से जुड़ा होने के कारण बौद्ध अनुयायियों के लिए विशेष आस्था का केंद्र है।
प्रमुख सचिव पर्यटन अमृत अभिजात ने बताया कि उत्तर प्रदेश पर्यटन विभाग पैसिफिक एशिया ट्रैवल एसोसिएशन (पाटा), जापान टूरिज्म एक्सपो (जाटा), आईएफटीएम टॉप रेसा और वर्ल्ड ट्रैवल मार्केट लंदन (डब्ल्यूटीएम) जैसे अंतरराष्ट्रीय मंचों पर प्रदेश के बौद्ध सर्किट को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत कर रहा है। इसके साथ ही थाईलैंड, वियतनाम, श्रीलंका, जापान सहित कई बौद्ध बहुल देशों के लिए आयोजित "बोधि यात्रा" पहल ने उत्तर प्रदेश की वैश्विक पर्यटन पहचान को और अधिक सुदृढ़ किया है।
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