पुणे , फरवरी 5 -- बॉम्बे उच्च न्यायालय ने वित्तीय कदाचार के आरोपों से जुड़े एक महत्वपूर्ण कानूनी घटनाक्रम में आरोपी मजीद उस्मान अत्तार की नियमित जमानत याचिका मंजूर कर ली।
यह मामला पुणे के कोंढवा पुलिस स्टेशन में 2024 में दर्ज प्राथमिकी से जुड़ा है जिसमें लगभग 1.53 करोड़ रुपये के निवेश की धोखाधड़ी और उसके गलत इस्तेमाल का आरोप हैं।
अभियोजन का मामला उन आरोपों से संबंधित है कि आवेदक को 10,00,000 रुपये मिले और उसने इन पैसों का इस्तेमाल अचल संपत्ति खरीदने में किया। आवेदक को 23 अप्रैल 2024 को गिरफ्तार किया गया था और पुणे के सत्र न्यायालय की ओर से उसकी पिछली जमानत याचिका खारिज कर देने के बाद वह 18 महीने से अधिक समय तक न्यायिक हिरासत में रहा।
बचाव पक्ष के अनुसार, आवेदक ना तो प्राथमिकी में उल्लिखित वित्तीय प्रतिष्ठानों का मालिक था, न ही सदस्य था। उसके व्यक्तिगत खाते में न कोई धनराशि जमा की गयी थी। आगे यह तर्क दिया गया कि जिस साक्ष्य पर भरोसा किया गया, वह पूरी तरह से दस्तावेजी प्रकृति का है। उसे पहले ही जब्त कर लिया गया था। पूरक आरोप पत्र में आवेदक के खिलाफ कोई अतिरिक्त या स्वतंत्र आपत्तिजनक भूमिका नहीं थी।
बचाव पक्ष ने आरोप पत्र का हिस्सा रहे बैंक रिकॉर्ड्स की ओर भी इशारा किया, जो यह संकेत देते हैं कि विवादित धनराशि को विशेष रूप से केवल शिकायतकर्ता का नहीं माना जा सकता।
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