नयी दिल्ली , दिसंबर 17 -- सेंटर फॉर डोमेस्टिक इकोनॉमी पॉलिसी रिसर्च (सीडीईपीआर) की रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत का एकमात्र प्रमुख बैराइट भंडार शीघ्र समाप्त होने के कगार पर है, जिससे देश की दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा गंभीर जोखिम में पड़ सकती है। घरेलू स्तर पर उच्च दर से खनन जारी रहने के कारण भारत अब दुनिया की एकमात्र प्रमुख अर्थव्यवस्था है जिसके पास उपयोग योग्य बैराइट भंडार 10 वर्षों से भी कम शेष हैं।
"ऊर्जा सुरक्षा पर बैराइट भंडार के तीव्र क्षय का प्रभाव: एक विश्लेषण" शीर्षक वाली यह रिपोर्ट आईआईटी दिल्ली में बुधवार को जारी की गयी । इसका विमोचन प्रवीण प्रकाश, आईएएस (सेवानिवृत्त), आंध्र प्रदेश मिनरल डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (एपीएमडीसी) के पूर्व प्रबंध निदेशक ने किया है।
बैराइट तेल और गैस ड्रिलिंग के लिए एक अनिवार्य खनिज है और अन्वेषण के दौरान उच्च दबाव वाले कुओं को स्थिर रखने के लिए इसका कोई व्यवहारिक विकल्प उपलब्ध नहीं है। घरेलू आपूर्ति सुनिश्चित न होने की स्थिति में अंडमान बेसिन और कृष्णा-गोदावरी बेसिन में देश के अन्वेषण कार्यक्रमों को तत्काल परिचालन बाधाओं का सामना करना पड़ेगारिपोर्ट में बताया गया है कि भारत के बैराइट संसाधनों का लगभग 95 प्रतिशत हिस्सा आंध्र प्रदेश की मंगमपेट खदान में केंद्रित है, जहाँ सिद्ध भंडार 2015 में 4.9 करोड़ टन से घटकर 2024 में 2.3 करोड़ टन से भी कम रह गया है-यानी एक दशक में 53 प्रतिशत की गिरावट आयी है।
श्री प्रकाश ने कहा, "बैराइट भंडार का क्षय केवल खनिज का मुद्दा नहीं है; यह राष्ट्रीय ऊर्जा सुरक्षा का गंभीर प्रश्न है। भारत की कच्चे तेल की 90 प्रतिशत से अधिक मांग आयात से पूरी होती है, ऐसे में घरेलू भंडारों का अन्वेषण और दोहन अत्यंत आवश्यक है। बैराइट यह तय करता है कि भविष्य में भारत सुरक्षित और कुशल तरीके से ड्रिलिंग कर पाएगा या नहीं। इस संसाधन का संरक्षण एक रणनीतिक प्राथमिकता बनना चाहिए।"रिपोर्ट में बताया गया है कि भंडारों में तेज गिरावट का प्रमुख कारण निर्यात है, जिसका बड़ा हिस्सा अब अमेरिका को जाता है। एपीएमडीसी ने बैराइट राजस्व के आधार पर लगभग 10,000 करोड़ रुपये के बॉन्ड भी जारी किए हैं, जिससे संरक्षण की बजाय निरंतर खनन पर वित्तीय निर्भरता बढ़ गई है।
सीडीईपी के विश्लेषण के अनुसार, 2016 में चीन द्वारा अपने भंडारों के संरक्षण के लिए निर्यात पर प्रतिबंध लगाए जाने के बाद भारत दुनिया का सबसे बड़ा बैराइट निर्यातक बन गया। वर्तमान में, भारत अमेरिका के कुल बैराइट आयात का लगभग 44 प्रतिशत आपूर्ति करता है, जबकि उसके भंडार अमेरिका, ईरान, कज़ाख़स्तान और तुर्की जैसे प्रमुख उत्पादक देशों की तुलना में कहीं कम हैं।
हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित