बैतूल , दिसंबर 29 -- मध्यप्रदेश में बैतूल के ग्रीन सिटी क्षेत्र में ऑस्ट्रेलिया और न्यू गिनी क्षेत्र में पाई जाने वाली दुर्लभ प्रजाति का उल्लू मिलने से वन्यजीव प्रेमियों और विशेषज्ञों में उत्सुकता बढ़ गई है। यह उल्लू ब्राउन हॉक-आउल, जिसे बू-बुक आउल भी कहा जाता है, बताया जा रहा है। मध्य भारत के बैतूल जैसे क्षेत्र में इस प्रजाति का पाया जाना अत्यंत असामान्य माना जा रहा है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार सोमवार को ग्रीन सिटी क्षेत्र के एक गार्डन में यह उल्लू घायल अवस्था में पड़ा मिला। स्थानीय नागरिक ने तत्काल इसकी सूचना वन विभाग को दी। सूचना मिलते ही फॉरेस्ट गार्ड तपन उबनारे के नेतृत्व में टीम मौके पर पहुंची और उल्लू को सुरक्षित रेस्क्यू किया गया। वन विभाग के अनुसार उड़ान के दौरान संतुलन बिगड़ने से उल्लू नीचे गिर गया था और पेड़ के नीचे बैठा हुआ मिला।

रेस्क्यू के बाद उल्लू को पशु चिकित्सक के पास ले जाया गया। पशु चिकित्सक डॉ. मृदुला सिन्हा ने बताया कि उल्लू की आंख में हल्की चोट पाई गई है। इसका वजन करीब 500 ग्राम है और यह कम उम्र का उल्लू है। उन्होंने बताया कि अत्यधिक ठंड के कारण कोल्ड स्ट्रेस की स्थिति बन जाती है, जिससे कमजोरी आ सकती है और उड़ान के समय संतुलन बिगड़ जाता है। फिलहाल चोट गंभीर नहीं है और उपचार के बाद स्थिति में सुधार हो रहा है।

डॉ. सिन्हा ने बताया कि जैसे मनुष्यों में ठंड और गर्मी से तनाव होता है, उसी प्रकार पक्षियों में भी कोल्ड और हीट स्ट्रेस देखने को मिलता है, जिससे सर्द मौसम में इस तरह की घटनाएं सामने आती हैं।

वन विभाग ने उल्लू को कालापाठा स्थित फॉरेस्ट रेस्ट हाउस में निगरानी में रखा है, जहां चार से पांच दिनों तक विशेष देखरेख की जाएगी। पूरी तरह स्वस्थ होने के बाद उल्लू को उसके प्राकृतिक आवास में छोड़ा जाएगा।

प्राणी विज्ञानी प्रो. प्रमोद मिश्रा ने बताया कि ब्राउन हॉक-आउल या बू-बुक आउल एक दुर्लभ और प्रवासी प्रजाति है, जो सामान्यतः ठंडे क्षेत्रों में बड़े पेड़ों के कोटरों में रहती है और रात्रिचर होती है। बैतूल क्षेत्र में इसका दिखाई देना दुर्लभ घटना है और यह क्षेत्र की जैव विविधता के लिए सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।

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