बैतूल, दिसंबर 30 -- मध्यप्रदेश के आदिवासी बहुल्य बैतूल जिले में प्रस्तावित पीपीपी (पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप) मॉडल मेडिकल कॉलेज को लेकर विरोध तेज हो गया है। जय आदिवासी युवा शक्ति (जयस) ने इसे आदिवासी, गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों के हितों के खिलाफ बताते हुए निजीकरण की साजिश करार दिया। संगठन ने मुख्यमंत्री के नाम कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर जिले में पूर्ण रूप से शासकीय मेडिकल कॉलेज स्थापित करने की मांग की है।
ज्ञापन में जयस युवा प्रकोष्ठ के जिला अध्यक्ष सोनू धुर्वे ने कहा कि पीपीपी मॉडल से मेडिकल शिक्षा अत्यधिक महंगी हो जाएगी, जिससे आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के छात्र डॉक्टर बनने के सपने से वंचित रह जाएंगे। उन्होंने बताया कि वर्तमान में शासकीय मेडिकल कॉलेज की वार्षिक फीस लगभग 50 हजार रुपये है, जबकि पीपीपी मॉडल में यह कई गुना बढ़ सकती है।
युवा आदिवासी विकास संगठन के जिला अध्यक्ष जितेंद्र सिंह इवने ने कहा कि पीपीपी मॉडल में निजी संस्थाएं अपने मुनाफे के अनुसार नियम बनाती हैं, जिससे सरकारी मानकों और सामाजिक दायित्वों की अनदेखी होती है। उन्होंने आशंका जताई कि छात्रों और मरीजों से भारी शुल्क वसूला जाएगा।
ज्ञापन में आरोप लगाया गया कि बैतूल विधायक हेमंत खण्डेलवाल और मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बैतूल में शासकीय मेडिकल कॉलेज खोलने की घोषणा की थी, लेकिन अब पीपीपी मॉडल लागू किया जा रहा है, जो जनता के साथ छल है। जयस ने इसे पूंजीवाद को बढ़ावा देने वाला कदम बताते हुए भविष्य में इसके गंभीर सामाजिक परिणाम होने की चेतावनी दी।
संगठन ने पीपीपी मॉडल मेडिकल कॉलेज में एससी, एसटी और ओबीसी वर्ग के आरक्षण, फीस और नियमों की पारदर्शिता पर भी सवाल उठाए।
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