बैतूल , अप्रैल 16 -- मध्यप्रदेश के बैतूल शहर में जल संकट गहराता जा रहा है। नगर पालिका द्वारा नागरिकों से 2 से 3 दिन का पानी पहले से स्टोर करके रखने की अपील ने स्थिति की गंभीरता को उजागर कर दिया है। आमतौर पर इस तरह की सलाह आपातकालीन परिस्थितियों में दी जाती है, लेकिन वर्तमान हालात शहर की कमजोर जलप्रदाय व्यवस्था की ओर स्पष्ट संकेत दे रहे हैं।

नगर में पहले से ही एक दिन छोड़कर जलापूर्ति की जा रही है। शहर को प्रतिदिन लगभग 17 एमएलडी पानी की आवश्यकता है, जबकि वर्तमान में केवल 8 से 10 एमएलडी पानी ही उपलब्ध हो पा रहा है। सीमित जल स्रोतों और पंपिंग क्षमता के कारण आपूर्ति व्यवस्था पर लगातार दबाव बना हुआ है।

सबसे चिंताजनक स्थिति माचना नदी की है, जहां केवल पांच दिनों का पानी शेष बताया जा रहा है। इसके चलते प्रशासन ने वैकल्पिक उपायों के रूप में निजी नलकूपों का अधिग्रहण, हैंडपंपों की मरम्मत और टैंकरों से जलापूर्ति शुरू की है, लेकिन ये सभी उपाय अस्थायी ही साबित हो रहे हैं।

शहर के कई इलाकों में अनियमित जलापूर्ति के कारण लोग पहले ही परेशान हैं। ऐसे में पानी स्टोर करने की अपील ने नागरिकों की चिंता और बढ़ा दी है। स्थानीय लोगों का कहना है कि हर वर्ष गर्मी में यही स्थिति बनती है, लेकिन दीर्घकालिक योजना के अभाव में समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो पा रहा है।

इधर, माचना डैम में जलस्तर कम होने के कारण खेड़ी ताप्ती बैराज अब मुख्य जल स्रोत बन गया है। हाल ही में बैराज क्षेत्र में बिजली आपूर्ति बाधित होने से जलापूर्ति प्रभावित हुई। फिल्टर प्लांट तक पानी नहीं पहुंच पाने के कारण टंकियां समय पर नहीं भर सकीं, जिससे कई वार्डों में पानी नहीं पहुंच पाया।

नगरपालिका जलशाखा प्रभारी धीरेंद्र राठौर के अनुसार, बिजली बाधित होने से सप्लाई प्रभावित हुई थी, जिसे अब सामान्य करने के प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि शहर में प्रतिदिन करीब 9 टंकियां भरी जाती हैं और समय में थोड़ी भी गड़बड़ी से पूरी व्यवस्था प्रभावित हो जाती है।

सीएमओ नवनीत पांडे ने बताया कि अमृत योजना के तहत नई पाइपलाइन और टंकियों को जोड़ने का प्रस्ताव तैयार किया गया है, जिससे भविष्य में जल आपूर्ति व्यवस्था को बेहतर किया जा सके। फिलहाल, शहर को आने वाले दिनों में गंभीर जल संकट का सामना करना पड़ सकता है।

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