बेलगावी , अप्रैल 02 -- कर्नाटक के बेलगावी शहर के होटलों में पश्चिम एशिया में चल रही जंग की वजह से उपजे गैस संकट का असर दिखने लगा है, जिसके चलते यहाँ के होटल व्यवसायी एलपीजी के बजाय बायोमास ईंधन की ओर रुख करने के लिए मजबूर हो रहे हैं।
महाराष्ट्र से सटे इस जिले में व्यावसायिक एलपीजी सिलेंडरों की भारी कमी हो गई है, जिससे मेहमान नवाजी का बिजनेस संकट में है। आंकड़ों के अनुसार, यहाँ के 350 से अधिक होटलों को प्रतिदिन लगभग 1,600 सिलेंडरों की आवश्यकता होती है, लेकिन आपूर्ति मात्र 600 सिलेंडरों तक रह गई है। इस बड़े अंतर के कारण होटलों के लिए रसोई चलाना मुश्किल हो गया है।
ईंधन की इस कमी का असर यह है कि कई होटलों और भोजनालयों ने या तो अपना कारोबार कम कर दिया है या उन्हें अस्थायी रूप से बंद करना पड़ा है। उद्योग प्रतिनिधियों का कहना है कि इस कमी से राजस्व और कामकाज सीधे तौर पर कम हुआ है। साथ ही यह भी पता चला है कि आयात पर निर्भर ईंधन प्रणालियां, सियासी झटकों को बर्दाश्त नहीं कर सकतीं हैं।
जवाब में होटल मालिक व्यावहारिक विकल्प के रूप में बायोमास चूल्हों की ओर बढ़ रहे हैं। जो तकनीक पहले कुछ ही प्रतिष्ठानों तक सीमित थी, उसे अब तेजी से अपनाया जा रहा है। बायोमास प्रणालियों का उपयोग करने वाले होटलों की संख्या थोड़े ही समय में 30 से बढ़कर 180 से अधिक हो गई है। खेत के बचे ठूंठ, नारियल के छिलके और लकड़ियों से चलने वाले ये चूल्हे अपनी कम लागत और स्थानीय उपलब्धता के कारण लोकप्रिय हो रहे हैं। कुछ प्रतिष्ठानों ने तो काम जारी रखने के लिए पारंपरिक लकड़ी के चूल्हों का सहारा लेना भी शुरू कर दिया है।
गौरतलब है कि यह तकनीक नई नहीं है। टेरी और भारतीय विज्ञान संस्थान जैसे संस्थानों के शोध से विकसित बायोमास गैसीफायर और चूल्हे वर्षों से औद्योगिक और व्यावसायिक क्षेत्रों में उपयोग किए जा रहे हैं। बेलगावी में 'फीनिक्स प्रोडक्ट' जैसी स्थानीय फर्में दशकों से इन प्रणालियों की आपूर्ति कर रही हैं। व्यवसायियों का कहना है कि बायोमास प्रणालियां न केवल खाना पकाने बल्कि भाप बनाने और हीटिंग जैसे कार्यों में भी उपयोगी और किफायती साबित हो रही हैं।
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