बेमेतरा , मई 11 -- ) छत्तीसगढ़ के बेमेतरा जिले में तीन दशक से अधिक पुराना नरी जलाशय डुबान क्षेत्र का भूमि अधिग्रहण विवाद एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है।
प्रभावित किसानों ने सोमवार को प्रशासन पर बिना किसी पूर्व सूचना के उनके खसरा नंबर ऑनलाइन रिकॉर्ड से हटाने का आरोप लगाया। किसानों ने इस कार्रवाई को एकतरफा बताते हुए जिला कलेक्टर से सोमवार को मिलकर न्याय की मांग की ।
मामला बेमेतरा जिले के नरी ग्राम जलाशय डुबान क्षेत्र से जुड़ा है। प्रभावित किसानों ने कलेक्टर को आवेदन सौंपकर अपनी पीड़ा व्यक्त करते हुए बताया कि वर्ष 1993 में जल संसाधन विभाग द्वारा लगभग 41.98 एकड़ कृषि भूमि के अधिग्रहण का प्रस्ताव तैयार किया गया था। उस समय किसानों ने कम मुआवजे को लेकर आपत्ति दर्ज करते हुए अधिग्रहण प्रक्रिया का विरोध किया था। किसानों का कहना है कि तत्कालीन समय में भूमि का बाजार मूल्य काफी कम आंका गया था, जबकि वे उचित मुआवजे की मांग कर रहे थे। विवाद के चलते अधिग्रहण की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी और किसान तब से अब तक उसी भूमि पर खेती करते आ रहे हैं।
प्रभावित किसानों के अनुसार वे पिछले 33 वर्षों से इस कृषि भूमि पर खेती कर अपने परिवार का भरण-पोषण कर रहे हैं। साथ ही उन्हें शासन की विभिन्न योजनाओं जैसे खाद, बीज, फसल बीमा एवं धान खरीदी का लाभ भी प्राप्त होता रहा है।
किसानों ने आरोप लगाया है कि अप्रैल 2026 से प्रशासन द्वारा बिना किसी पूर्व सूचना के उनके खसरा नंबर ऑनलाइन राजस्व रिकॉर्ड से हटाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गयी है। किसानों का कहना है कि इस संबंध में न तो कोई लिखित सूचना दी गई और न ही मुआवजा अथवा पुनर्वास को लेकर कोई स्पष्ट जानकारी दी गयी है।
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