बेंगलुरु , मार्च 10 -- कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने बेंगलुरु में वाणिज्यिक एलपीजी सिलेंडरों की संभावित कमी को लेकर चिंता जताई और केंद्र सरकार से तुरंत हस्तक्षेप करने की अपील की है। उन्होंने कहा कि यदि यह कमी जारी रही तो शहर के कई होटल और रेस्तरां को अपने संचालन बंद करने पड़ सकते हैं।
मुख्यमंत्री ने इस संबंध में मंगलवार को केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी को पत्र लिखकर होटल, कैटरिंग संस्थानों और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के लिए एलपीजी आपूर्ति में आ रही बाधाओं को दूर करने की मांग की है।
पत्र में श्री सिद्धारमैया ने कहा कि पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय द्वारा रविवार को जारी संशोधित आदेश के तहत तेल विपणन कंपनियों को घरेलू उपभोक्ताओं के लिए एलपीजी उत्पादन और आपूर्ति को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए गये हैं। इसके कारण बेंगलुरु में वाणिज्यिक एलपीजी सिलेंडरों की कमी पैदा हो गई है।
उन्होंने कहा कि घरेलू उपभोक्ताओं को निर्बाध गैस आपूर्ति सुनिश्चित करने की मंशा सराहनीय है, लेकिन इस निर्देश के क्रियान्वयन से उन व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को कठिनाई हो रही है जो रोजमर्रा के संचालन के लिए एलपीजी पर निर्भर हैं।
मुख्यमंत्री के अनुसार कई होटल और रेस्तरां संघों ने बताया है कि उन्हें वाणिज्यिक एलपीजी सिलेंडर नहीं मिल पा रहे हैं और यदि जल्द आपूर्ति बहाल नहीं हुई तो कई प्रतिष्ठानों को अस्थायी रूप से बंद करना पड़ सकता है।
उन्होंने कहा कि बेंगलुरु में छोटे रेस्तरां, मेस और कैटरिंग इकाइयों का बड़ा नेटवर्क है जो हर दिन लाखों लोगों को भोजन उपलब्ध कराता है। इनके संचालन में बाधा आने से शहर के दैनिक जीवन पर सीधा असर पड़ सकता है।
श्री सिद्धारमैया ने बताया कि राज्य की वाणिज्यिक एलपीजी मांग को आम तौर पर तीन तेल विपणन कंपनियां इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन, हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड और भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड पूरा करती हैं।
उन्होंने कहा कि सामान्य परिस्थितियों में बेंगलुरु को प्रतिदिन लगभग 500-550 मीट्रिक टन एलपीजी इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन, करीब 300 मीट्रिक टन हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड और लगभग 230 मीट्रिक टन भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड से प्राप्त होता है।
मुख्यमंत्री ने यह भी चेतावनी दी कि यदि आपूर्ति बाधित रही तो घर से दूर रहने वाले बड़ी संख्या में छात्र और कामकाजी लोग भी प्रभावित होंगे, जो रोजाना भोजन के लिए होटल और मेस पर निर्भर रहते हैं।
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