भुवनेश्वर , अप्रैल 28 -- बीजू जनता दल (बी.जे.डी.) के राज्यसभा सांसद सस्मित पात्रा ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से ओडिशा में राज्यसभा चुनावों के दौरान भाजपा के दो विधायकों को कथित तौर पर अवैध रूप से दूसरा मतपत्र जारी किये जाने की समयबद्ध, स्वतंत्र और पारदर्शी जांच के आदेश देने का आग्रह किया है।
मुख्य चुनाव आयुक्त को लिखे पत्र में श्री पात्रा ने अनुरोध किया कि बी.जे.डी. के एक प्रतिनिधिमंडल के लिए उनसे मिलने और मामले को विस्तार से प्रस्तुत करने के लिए जल्द से जल्द कोई तारीख और समय तय किया जाये। बी.जे.डी. अध्यक्ष नवीन पटनायक के निर्देश पर कार्रवाई करते हुए श्री पात्रा ने चुनाव आयोग से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की और कहा कि यह मुद्दा वैधानिक चुनाव प्रक्रियाओं के पालन और चुनावी प्रक्रिया की अखंडता पर गंभीर चिंता पैदा करता है।
श्री पात्रा ने कहा कि इस मामले को 18 मार्च को नवीन पटनायक द्वारा भेजे गये एक ई-मेल के माध्यम से औपचारिक रूप से चुनाव आयोग के ध्यान में लाया गया था। उस शिकायत का हवाला देते हुए श्री पात्रा ने कहा कि इसमें आरोप लगाया गया है कि निर्वाचन संचालन नियम, 1961 का उल्लंघन करते हुए भाजपा विधायक पूर्ण चंद्र सेठी और उपासना महापात्र को अवैध रूप से दूसरा मतपत्र जारी किया गया था। शिकायत में उन दूसरे मतपत्रों पर डाले गये वोटों को खारिज करने की भी मांग की गयी थी।
कानूनी दृष्टिकोण से श्री पात्रा ने तर्क दिया कि पहले मतपत्र पर निशान लगाने के बाद दूसरा मतपत्र जारी करना प्रथम दृष्टया निर्वाचन संचालन नियम, 1961 के विरुद्ध है, जो केवल कड़ाई से परिभाषित 'खराब मतपत्र' प्रक्रिया के तहत ही दूसरे मतपत्र की अनुमति देता है।
उन्होंने कहा कि वैधानिक प्रक्रिया से कथित विचलन केवल एक तकनीकी चूक नहीं थी, बल्कि इसने मतपत्रों की गणना, मतदाता की मंशा और मत की पवित्रता को प्रभावित करके चुनावी प्रक्रिया की नींव पर प्रहार किया है।श्री पात्रा ने कहा कि राज्यसभा चुनाव में, जहां निर्वाचक मंडल सीमित होता है और प्रत्येक मत महत्वपूर्ण होता है, ऐसी अनियमितता परिणाम को काफी हद तक प्रभावित कर सकती है।
उन्होंने कहा कि बी.जे.डी. ने मतदान के दौरान औपचारिक रूप से विस्तृत लिखित आपत्तियां प्रस्तुत की थीं और इन आपत्तियों तथा प्रस्तुतियों की चुनाव आयोग के कर्मियों ने आधिकारिक रूप से वीडियो रिकॉर्डिंग और फोटोग्राफी की थी, जिससे वे आधिकारिक रिकॉर्ड का हिस्सा बन गये।
श्री पात्रा ने कहा कि इन आपत्तियों, दस्तावेजी साक्ष्यों और दल के नेतृत्व द्वारा बार-बार मामला उठाए जाने के बावजूद अब तक कोई प्रतिक्रिया, स्पष्टीकरण या की गयी कार्रवाई की रिपोर्ट नहीं दी गयी है।
उन्होंने कहा कि निरंतर चुप्पी न केवल प्रक्रियात्मक अनियमितताओं के बारे में, बल्कि चुनावी प्रक्रिया में एक स्पष्ट अवैधता को संबोधित करने में संस्थागत विफलता के बारे में भी गंभीर चिंता पैदा करती है।
श्री पात्रा ने मुख्य चुनाव आयुक्त से आयोग के संवैधानिक और वैधानिक अधिकार का प्रयोग करने की अपील की ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि कथित रूप से अवैध रूप से जारी किये गये दूसरे मतपत्रों पर डाले गये वोटों के साथ कानून के अनुसार सख्ती से निपटा जाये।
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