बगलकोट , अप्रैल 04 -- कर्नाटक विधानसभा में विपक्ष के नेता आर. अशोक ने मुख्यमंत्री सिद्दारमैया पर निशाना साधते हुए प्रदेश में राजनीतिक अस्थिरता का आरोप लगाया और दावा किया कि 20 अप्रैल के बाद उप मुख्यमंत्री डी के शिवकुमार मुख्यमंत्री पद के लिए दावा ठोक सकते हैं।

बगलकोट में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में श्री अशोक ने श्री सिद्दारमैया के चुनावी इतिहास पर तंज कसते हुए कहा कि मैसूर में मतदाताओं ने उन्हें पहले ही नकार दिया था, जिसके बाद वे बादामी गये और अब फिर से बगलकोट क्षेत्र में लौटे हैं।

उन्होंने कहा कि श्री सिद्दारमैया 'पहले बादामी आये, वहां से लाभ उठाया और फिर चले गये,' और अब उनके दोबारा लौटने पर भी उन्होंने उनकी राजनीतिक प्रतिबद्धता पर सवाल उठाये।

श्री अशोक ने मुख्यमंत्री के विकास दावों पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि लगभग तीन साल से सत्ता में होने के बावजूद बुनियादी ढांचे और कल्याणकारी क्षेत्रों में खास प्रगति नहीं हुई है। उन्होंने आरोप लगाया कि कोई बड़ा बांध या मेडिकल कॉलेज स्थापित नहीं किया गया और सिंचाई परियोजनाओं के लिए पर्याप्त धन आवंटित नहीं हुआ।

उन्होंने राज्य सरकार पर कई भ्रष्टाचार के आरोप भी लगाये, जिनमें वाल्मीकि कॉरपोरेशन घोटाले से लेकर सरकारी ठेकों में कथित कमीशन अनियमितताओं तक के मुद्दे शामिल हैं। साथ ही, शराब से जुड़े लॉबिंग के माध्यम से धन के दुरुपयोग का भी आरोप लगाया।

स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर डॉक्टरों और दवाओं की कमी है और धन की कमी के कारण निविदा प्रक्रिया धीमी पड़ गयी है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि 'फिजूलखर्ची' के कारण राज्य पर कर्ज का बोझ बढ़ा है।

कांग्रेस के अंदरूनी हालात पर टिप्पणी करते हुए श्री अशोक ने कहा कि मुख्यमंत्री पद को लेकर अंदरखाने प्रतिस्पर्धा चल रही है और श्री डी के शिवकुमार अंततः नेतृत्व की दौड़ में आगे आ सकते हैं। उन्होंने यह भी दावा किया कि वरिष्ठ नेता जी. परमेश्वर भी मौके की प्रतीक्षा कर रहे हैं, हालांकि उनके सफल होने की संभावना कम है।

किसानों की अनदेखी का आरोप लगाते हुए श्री अशोक ने कहा कि सिंचाई के लिए पर्याप्त धन नहीं दिया गया, जबकि पिछली भाजपा सरकार ने इस क्षेत्र में अधिक संसाधन आवंटित किये थे।

उन्होंने कांग्रेस की गारंटी योजनाओं की भी आलोचना करते हुए कहा कि इससे किसानों को वास्तविक आर्थिक राहत नहीं मिली है और कृषि क्षेत्र में संकट की स्थिति बनी हुई है।

अंत में उन्होंने राज्य की वित्तीय स्थिति के कुप्रबंधन का आरोप लगाते हुए कहा कि सार्वजनिक धन का दुरुपयोग हो रहा है और सरकार ने राज्य पर आर्थिक बोझ बढ़ा दिया है।

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