लखनऊ , मार्च 15 -- ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने और गांवों तक बैंकिंग सेवाएं पहुंचाने में उत्तर प्रदेश ने बड़ी उपलब्धि हासिल की है। बीसी सखी योजना के क्रियान्वयन में प्रदेश देश में पहले स्थान पर पहुंच गया है, जबकि मध्य प्रदेश दूसरे और राजस्थान तीसरे स्थान पर है।

वर्तमान में प्रदेश में स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी करीब 40 हजार महिलाएं बीसी सखी के रूप में गांवों में कार्य कर रही हैं। ये महिलाएं ग्रामीणों को बैंकिंग सुविधाएं उपलब्ध कराने के साथ-साथ खुद भी आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन रही हैं। योजना के तहत महिलाएं औसतन 10 से 15 हजार रुपये प्रतिमाह कमा रही हैं, जबकि कई बीसी सखियां एक महीने में 40 से 50 हजार रुपये तक का कमीशन अर्जित कर रही हैं।

राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के संयुक्त मिशन निदेशक जनमेजय शुक्ला के अनुसार लखनऊ, प्रयागराज और सुल्तानपुर समेत कई जिलों में महिलाएं इस योजना के माध्यम से आत्मनिर्भर बन रही हैं। लखनऊ की अनीता पाल और सुल्तानपुर की प्रियंका मौर्य जैसे उदाहरण इस योजना की सफलता को दर्शाते हैं, जो हर महीने आय के साथ करीब 50 हजार रुपये तक का कमीशन भी अर्जित कर रही हैं।

उन्होंने कहा कि योजना की सफलता को देखते हुए बैंक ऑफ बड़ौदा और स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के साथ अब बैंक ऑफ इंडिया, पंजाब नेशनल बैंक, यूनियन बैंक ऑफ इंडिया, इंडियन बैंक और केनरा बैंक भी उत्तर प्रदेश ग्रामीण आजीविका मिशन को सहयोग दे रहे हैं।

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