नयी दिल्ली , दिसंबर 16 -- विपक्ष ने लोकसभा में मंगलवार को सबका बीमा सबकी रक्षा (बीमा विधि संशोधन) विधेयक 2025 का विरोध करते हुए कहा कि सुधार जवाबदेही के साथ होना चाहिए।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने विधेयक को सदन के समक्ष चर्चा और पारित कराने के लिए रखते हुए कहा कि वर्तमान समय में एक ऐसा इको सिस्टम बना जिससे ज्यादा से ज्यादा लोगों को बीमा का लाभ मिला। सरकार कई प्रकार की बीमा योजनाएं लेकर आयी उसका मकसद कम प्रीमियम पर गरीबों का बीमा कराना और लोगों को लाभ पहुंचाना था। इससे पहले 26 प्रतिशत से 49 प्रतिशत प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) किया गया था जिससे बीमा कराने वालों की संख्या बढ़ी अब एफडीआई शत-प्रतिशत कर दिया गया है। अब समय है कि ज्यादा से ज्यादा लोगों का बीमा करायें ताकि विनियामक भी सुदृढ हो। इससे लोगों को निर्बाध सेवा मिलेगी। इस विधेयक का उद्देश्य पारदर्शिता को बढाना है इसलिए एफडीआई की सीमा को बढाया गया है।
कांग्रेस के मणिकम टैगोर ने कहा कि सरकार को इस विधेयक को लाने की इतनी जल्दबाजी क्यों है यह समझ से परे है। 1956 में बीमा का राष्ट्रीयकरण किया गया जिसका मकसद लोगों की सुरक्षा के लिए लाया गया। यह लोगों के कल्याण के लिए लाया गया था। सरकार जो विधेयक लायी है उसमें विदेशी निवेश का दायरा बढाया गया है। यह सुधार नहीं है यह एक नकारात्मक कदम है।
उन्होंने कहा कि सार्वजनिक बीमा कंपनियों के बीच प्रतिस्पर्धा के लिए नहीं इसे कमजोर करने के लिए लाया गया है। उन्होंने कहा हम सुधार में विश्वास करते हैं लेकिन सुधार जवाबदेही के साथ होनी चाहिए। बीमा को आधारभूत संरचना से जोड़ा जाना चाहिए।
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