भुवनेश्वर , जनवरी 15 -- बीजू जनता दल (बीजद) ने ओडिशा सरकार के नये विधानसभा भवन और लोक सेवा भवन के निर्माण के निर्णय पर गंभीर आपत्तियां जतायीं हैं और इन परियोजनाओं की जरूरत और वित्तीय योजना दोनों पर सवाल उठाये हैं।

राज्य में भारतीय जनता पार्टी( भाजपा) की अगुवाई वाली राज्य सरकार ने हाल ही में प्रस्तावित ईमारत का शिलान्यास किया है।

बीजद ने आरोप लगाया कि ऐसी स्थिति में जब जनता का असंतोष अपने चरम पर है सरकार ने अपनी विफलताओं से जनता का ध्यान हटाने के लिए यह कदम उठाया है।

बीजद प्रवक्ता एवं विधायक गौतम बुद्ध दास और पार्टी के मीडिया समन्वयक लेनिन मोहंती ने संवाददाताओं से बातचीत के दौरान आरोप लगाया कि सरकार की कमियों को छिपाने के लिए यह शिलान्यास किया गया है।

श्री दास ने कहा कि जहां सरकार ने किसानों को 800 रुपये के बोनस देने से इनकार किया है, वहीं उसने यह स्पष्ट नहीं किया है कि 3,623 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत वाली परियोजनाओं के लिए कोई बजटीय प्रावधान किया गया है या नहीं। उन्होंने आगे कहा कि परियोजना के बारे में विस्तृत जानकारी सार्वजनिक नहीं की गयी है तथा इसे 'गिमिक' और विभिन्न क्षेत्रों में विफलताओं पर बढ़ती नाराजगी के बीच आलोचना से बचने के प्रयास के रूप में वर्णित किया।

श्री दास ने सरकार की इस बात को गलत बताया कि परिसीमन की वजह से विधानसभा सीटों की संख्या बढ़कर 200 हो सकती है। उन्होंने कहा कि जनगणना पूरी होने के बाद ही परिसीमन शुरू हो सकता है। उन्होंने कहा कि तब तक सीटों की संख्या में बढ़ोतरी या कमी को लेकर कोई निश्चितता नहीं है, जिसके कारण सरकार का तर्क स्वीकार करने योग्य नहीं है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि भाजपा शासन के पिछले 18 महीनों के दौरान राज्य की कानून-व्यवस्था बिगड़ गयी है और वित्तीय स्थिति कमजोर हुई है। उन्होंने दावा किया कि जब 2024 में नवीन पटनायक सरकार ने सत्ता छोड़ी थी, तब ओडिशा पर 78,000 करोड़ रुपये का कर्ज था, लेकिन भाजपा सरकार ने डेढ़ साल के भीतर ही 91,000 करोड़ रुपये का कर्ज ले लिया है।"'डबल इंजन, डबल विकास' के नारे के साथ सत्ता में आयी भाजपा सरकार पर आरोप लगाते हुए श्री दास ने कहा कि राज्य को केंद्रीय अनुदान में 18.19 प्रतिशत की कमी आयी है। उन्होंने कहा कि अनुमानित लागत 4,474 करोड़ रुपये की एम्स प्लस परियोजना का लगभग 30 प्रतिशत पूर्व बीजद सरकार के कार्यकाल में पूरी हो गयी थी, लेकिन भाजपा के सत्ता में आने के बाद से विकास रुक गया है।

जन कल्याण संबंधी चिंताओं पर जोर देते हुए श्री मोहंती ने कहा कि लगभग आठ लाख लोग मधुबाबू पेंशन लाभों तथा12 लाख आवेदक नये राशन काॅर्ड की प्रतीक्षा कर रहे हैं जबकि छह लाख लाभार्थियों को सुभद्रा योजना से बाहर कर दिया गया है। उन्होंने बताया कि शिक्षक, डॉक्टर और आंगनवाड़ी कार्यकर्ता वेतन वृद्धि की मांग कर रहे हैं, जबकि लाभार्थी राशन वितरण में देरी का सामना कर रहे हैं और छात्रों को समय पर विद्यालय यूनिफॉर्म नहीं मिल रहे है।

श्री मोहंती ने आगे कहा कि 'अन्वेषा' योजना के तहत आने वाले आदिवासी छात्रों को पिछले पांच महीनों से कोई वित्तीय सहायता नहीं मिली है। उन्होंने आम जनता की रोजमर्रा की समस्याओं को हल करने के बजाय सरकार की तथाकथित दिखावटी परियोजनाओं को प्राथमिकता देने की आलोचना की।

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