जालंधर , फरवरी 19 -- पंजाब कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और भोलाथ से विधायक सुखपाल सिंह खैरा ने गुरुवार को पंजाब पुलिस द्वारा शांति से प्रदर्शन कर रहे भारतीय किसान यूनियन (उगराहां) के किसानों पर बेरहमी से किये गये बल प्रयोग की कड़ी निंदा की और इसे किसान समुदाय के लोकतांत्रिक अधिकारों पर शर्मनाक हमला बताया।
श्री खैरा ने कहा कि यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है कि बातचीत करने और किसानों की असली चिंताओं को दूर करने के बजाय, भगवंत मान की सरकार ने लाठीचार्ज, हिरासत और डराने-धमकाने का रास्ता चुना। उन्होंने कहा, " यह एक्शन आप सरकार की किसान विरोधी सोच को दिखाता है, जिसने उसी समुदाय के साथ धोखा किया है जो पंजाब की आर्थिकता की रीढ़ है।"उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री भगवंत मान अपने सुप्रीमो अरविंद केजरीवाल के इशारे पर काम कर रहे हैं और विरोध को दबाने के लिए दमन का सहारा ले रहे हैं।
श्री खैरा ने कहा, "लोकतांत्रिक विरोध को दबाने की आप सरकार की बढ़ती आदत उसकी असहिष्णुता और तानाशाही रवैये को दिखाती है।"उन्होंने कहा कि अध्यापकों, किसानों और दूसरी कर्मचारी यूनियनों समेत अलग-अलग विरोध करने वाले ग्रुप्स के खिलाफ पुलिस की हाल की बार-बार की गयी सख्ती साफ दिखाती है कि सरकार ने पंजाब को एक तरह से 'पुलिस स्टेट' बना दिया है, जहां किसी को भी असहमति जताने या सरकार की आलोचना करने की इजाज़त नहीं है। उन्होंने कहा, "विरोध की सही आवाज़ों को दबाने के लिए ताकत का सुनियोजित इस्तेमाल लोकतंत्र के लिए खतरनाक है और शांतिपूर्ण आंदोलन के संवैधानिक अधिकार को कमजोर करता है। "श्री खैरा ने इस बात पर ज़ोर दिया कि पंजाब में किसानों के आंदोलनों की एक शानदार विरासत है और चेतावनी दी कि पुलिस बल के ज़रिए शांतिपूर्ण विरोध को कुचलने की कोई भी कोशिश किसान समुदाय में सिर्फ़ नाराज़गी और अविश्वास को और बढ़ाएगी। उन्होंने कहा, "किसान अपराधी नहीं हैं, वे हमारे अन्नदाता हैं और उन्हें सम्मान, न्याय मिलना चाहिए, न कि डंडों और बैरिकेड्स से पाबंदी। "विधायक ने हिरासत में लिये गये सभी किसानों को तुरंत रिहा करने, उनके खिलाफ दर्ज केस वापस लेने और उनके मुद्दों को जल्द से जल्द हल करने केलिए एक अच्छी बातचीत शुरू करने की मांग की।
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