नयी दिल्ली , मार्च 17 -- वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सरकारी क्षेत्र की कंपनी भारत संचार निगम लि. (बीएसएनएल) पर विदेशी प्रौद्योगिकी खरीदने की रोक लगा कर उसे असमान प्रतिस्पर्धा में खड़ा करने के कांग्रेस के आरोप का मंगलवार को तीखा जवाब देते हुए कहा कि इस अग्रणी सरकारी दूरसंचार कंपनी को पिछली संप्रग सरकार ने मरे हाल पर पहुंचा कर छोड़ दिया था।
श्रीमती सीतारमण ने कहा, ' आज बीएसएनएल अपने दम पर अच्छा कर रहा है और नए लक्ष्यों को हासिल कर रहा है। लेकिन मैं यह सोच रही हूँ कि क्या चीन की कम्युनिस्ट पार्टी के साथ कांग्रेस का हुआ वह 2008 में हुआ समझौता बीएसएनएल को बदहाल करने से जुड़ा था? मैं जानना चाहती हूँ कि वह समझौता क्या था? क्या आप विदेशी तकनीक और उपकरण चाहते थे?"वित्त मंत्री राज्यसभा में वर्ष 2025-26 की अनुपूरक अनुदान की मांगों की दूसरी सूची और तत्संबंधी विनियोग विधेयक 2026 पर चर्चा का जवाब दे रही थीं। वित्त मंत्री के उत्तर के बाद सदन ने विनियोग विधेयक को यथा रूप लोकसभा को लौटा दिया जहां यह पहले ही पारित किया जा चुका है।
चर्चा के दौरान कांग्रेस के शक्ति सिंह गोहिल ने कहा था कि सरकार बीएसएनएल की मदद नहीं कर रही है तथा उसे जापान और कोरिया जैसे देशों से प्रौद्योगिकी खरीदने से रोक कर 'एक टांग बांध कर निजी क्षेत्र से प्रतिस्पर्धा के लिए छोड़ दिया गया। उन्होंने कहा था कि कंपनी को केवल भारतीय उत्पादों का ही उपयोग करने की छूट है जबकि निजी ऑपरेटरों पर ऐसा कोई दबाव नहीं है।
वित्त मंत्री ने इसके जवाब में कहा , " भारतीय उत्पादों का उपयोग कोई बाध्यता नहीं है। बल्कि वास्तव में एक अच्छी बात है, क्योंकि बीएसएनएल को 4जी तकनीक विकसित करने के लिए हमारी सरकार ने धन दिया गया था और उसने इसे सफलतापूर्वक विकसित किया है। कंपनी इसलिए इसका उपयोग कर रही है।"वित्त मंत्री ने कहा कि 4जी को पहले देश में निजी क्षेत्र ने इसे पेश किया, लेकिन संप्रग सरकार ने बीएसएनएल को 4जी के लिए धन नहीं दिया। उन्होंने कहा, ' अब जब हमारी अपनी स्वदेशी 4जी तकनीक उपलब्ध है, तो उसे उपयोग करने में क्या समस्या है?.. हमें आयात करके दूसरों की तकनीक क्यों इस्तेमाल करनी चाहिए?"उन्होंने कहा कि संप्रग सरकार ने उस समय बीएसएनएल को वंचित किया। उन्होंने कांग्रेस और चीन की कम्युनिस्ट पार्टी के बीच 2008 के एमओयू का उल्लेख करते हुए कहा उसी समय से देश के दूरसंचार क्षेत्र में विदेशी उपकरण इस देश में आते रहे। उन्होंने कहा, " कंपनियों के नाम लेने की आवश्यकता नहीं है। पर यह लगातार आता रहा और इस पर कोई नियंत्रण नहीं था। और बीएसएनएल आयात की इस बाढ़ के बीच संघर्ष करता रहा। उस समय कोई समर्थन नहीं था।"उन्होंने कहा कि संप्रग सरकार ने बीएसएनएल को 2005-06 के बाद लाइसेंस शुल्क की प्रतिपूर्ति करना बंद कर दिया था। कंपनी ने 37,513 करोड़ रुपये लाइसेंस शुल्क और स्पेक्ट्रम उपयोग शुल्क के रूप में भुगतान किया था लेकिन सरकार ने केवल 9,249 करोड़ रुपये ही वापस किये वह भी सिर्फ 2005-06 तक।
वित्त मंत्री ने कहा कि प्रतिपूर्ति न मिलने से बीएसएनएल और एमटीएनएल दोनों धीरे-धीरे कमजोर हो गये। एक कैश रिच - (नकदी से भरपूर) कंपनी एमटीएनएल अचानक कर्ज में डूब गई। बीएसएनएल ने भी 18,499 करोड़ रुपये का भुगतान किया, जिससे उसकी पूरी नकद पूंजी खत्म हो गई।
उन्होंने कहा कि यूपीए सरकार ने बीएसएनएल और एमटीएनएल को 2.5-2.6 गीगा हर्ट्ज बैंड स्पेक्ट्रम से वंचित रखा, जबकि निजी ऑपरेटरों को व्यावसायिक रूप से लाभकारी 2.3-2.4 गीगा हर्ट्ज बैंड दिया गया।कंपनी को कर्मचारी पुनर्गठन के लिए वित्तीय सहायता नहीं दी गई। उन्होंने कहा कि मंत्रिमंडल ने इसे फरवरी 2014 तक टाल दिया। इसी तरह इसे 1 प्रतिशत के रियायती ब्याज पर दीर्घकालिक ऋण का प्रस्ताव भी लंबित रखा गया, जबकि वित्त मंत्रालय और मंत्रियों के समूह ने इसका समर्थन किया था। वित्त मंत्री ने कहा, " बीएसएनएल के नेटवर्क विस्तार को भी बाधित किया गया।सरकारी विभागों द्वारा बीएसएनएल और एमटीएनएल सेवाओं का अनिवार्य उपयोग भी लागू नहीं किया गया। वर्ष 2006 का 4.55 करोड़ जीएसएम लाइनों का टेंडर विलंबित हुआ और फिर इसे घटाकर 1.45 करोड़ तक सीमित कर दिया गया। "उन्होंने यह भी कहा कि 2008 का बीएसएनएल को 9.3 करोड़ लाइनों का दुनिया का सबसे बड़ा टेंडर सैम पित्रोदा समिति की सिफारिशों पर 2010 में रद्द कर दिया गया। उन्होंने श्री पित्रोदा को ' गुरू' बताते हुए कहा कि संप्रग के इस तरह के निर्णयों से बीएसएनएल की बाजार हिस्सेदारी 2005 में 19 प्रतिशत थी, जो 2014 तक 10.5 प्रतिशत और 2015 तक 7.96 प्रतिशत रह गई। धीरे-धीरे इसकी बाजार स्थिति कमजोर होती गई।
उन्होंने कहा , ' इन सबके बावजूद, हमारी सरकार के आने के बाद बीएसएनएल के लिए तीन बार पुनरुद्धार पैकेज दिए गए, जिनकी कुल राशि लगभग 3.22 लाख करोड़ रुपये है। हम आज भी उस समय की नीतियों का बोझ उठा रहे हैं-चाहे वह आर्थिक स्थिति हो, बैंक पुनर्गठन हो, या अन्य क्षेत्र।" उन्होंने अपनी सरकार के समय में कंपनी को 700 मेगा हर्ट्ज, 800 , 1800 , 2100 , 2500 , 3300 मेगा हर्ट्ज-सभी बैंड में 4जी और 5जी के लिए स्पेक्ट्रम दिये जाने ओर सभी मंत्रालयों और विभागों में बीएसएनएल का उपयोग अनिवार्य करने के निर्देशों का भी उल्लेख किया।
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