मुंबई , जनवरी 25 -- नागरिकों और पर्यावरण कार्यकर्ताओं के लंबे दबाव के बाद बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) ने मई 2026 तक पवई झील में बिना उपचारित सीवेज के प्रवाह को पूरी तरह बंद करने का संकल्प लिया है। यह कदम मुंबई की सबसे बड़ी और पर्यावरणीय रूप से महत्वपूर्ण तालाब में से एक के संरक्षण की दिशा में अहम माना जा रहा है।
उत्तर मुंबई में स्थित 210 हेक्टेयर क्षेत्र में फैली पवई झील में वर्तमान में प्रतिदिन लगभग 1.8 करोड़ लीटर बिना उपचारित सीवेज विभिन्न नालों के जरिए पहुंच रहा है। इससे झील में अत्यधिक जलकुंभी उग आयी है, ऑक्सीजन स्तर घटा है तथा संरक्षित मार्श क्रोकोडाइल और मछलियों सहित जलीय जीवन पर गंभीर खतरा पैदा हो गया है। पवई झील को केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने प्रमुख आर्द्रभूमि के रूप में मान्यता दी हुई है।
बीएमसी के अनुसार, सीवेज को झील से बाहर मोड़ने का काम शुरू कर दिया गया है। हाल ही में उप नगर आयुक्त शशांक भोरे ने स्थानीय हितधारकों के साथ बैठक में सीवेज डायवर्जन योजना का विवरण साझा किया। इसके तहत झील में जाने वाले पूरे सीवेज को वैकल्पिक मार्गों से उपचार संयंत्रों तक भेजा जाएगा ताकि झील में सीधा प्रवाह शून्य हो सके।
अधिकारियों ने बताया कि दो नालों को पहले ही पेरू बाग के पास नयी सीवर लाइन से जोड़कर मीठी नदी के सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट की ओर मोड़ दिया गया है। झील के आसपास के गेट 1 से 14 से आने वाले करीब 8.05 एमएलडी सीवेज को पवई के सुवर्ण मंदिर के पास प्रस्तावित नये ट्रीटमेंट प्लांट में उपचारित करने की योजना है। इसके शुरू होने तक इस सीवेज को भांडुप पंपिंग स्टेशन भेजा जाएगा।
गेट 15 से 18 से आने वाले शेष नालों को 800 मिमी की मौजूदा सीवर लाइन से भांडुप सुविधा तक मोड़ा जा रहा है। अतिरिक्त भार को संभालने के लिए भांडुप पंपिंग स्टेशन की क्षमता 225 एमएलडी तक बढ़ाई जा रही है, जिसका कार्य अप्रैल-मई तक पूरा होने की उम्मीद है।
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