वाराणसी , फरवरी 11 -- काशी हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) के संस्कृत विद्या धर्म विज्ञान संकाय में 13 और 14 फरवरी 2026 को 'काशी-नेपालशास्त्र-संगम' का दो दिवसीय आयोजन किया जा रहा है। इस कार्यक्रम में नेपाल के उन विद्वानों को आमंत्रित किया गया है, जिन्होंने संस्कृत शास्त्रों का गहन अध्ययन किया है। काशी के विशिष्ट विद्वानों के साथ शास्त्रीय एवं सांस्कृतिक परिचर्चा विभिन्न सत्रों के माध्यम से होगी।
कार्यक्रम में शास्त्रार्थ, परिसंवाद, काशी भ्रमण तथा कला-संस्कृति का परिचय प्रमुख रूप से शामिल है।
कार्यक्रम की शुरुआत 13 फरवरी को प्रातः 7 बजे नेपाल से आए विशिष्ट विद्वानों द्वारा मुख्य कार्यपालक अधिकारी के नेतृत्व में श्री काशी विश्वनाथ मंदिर में दर्शन-पूजन से होगी। इसके बाद प्रातः 9:30 बजे प्रो. ब्रजभूषण ओझा (महाव्यवस्थापक) के नेतृत्व में बीएचयू स्थित श्री विश्वनाथ मंदिर में दर्शन-पूजन होगा।
अतिथियों एवं गणमान्यजनों के आगमन के बाद संस्कृत विद्या धर्म विज्ञान संकाय में प्रो. राजाराम शुक्ल (संकाय प्रमुख) की अध्यक्षता में प्रातः 11 बजे उद्घाटन समारोह आयोजित होगा। इसमें मुख्य अतिथि अशोक कुमार तिवारी (मेयर), सारस्वत अतिथि प्रो. हरिप्रसाद अधिकारी तथा दिव्य सान्निध्य श्री श्री शंकरपुरी महाराज (महंत-अन्नपूर्णा मठ मंदिर) रहेंगे।
दोपहर 2 बजे से शास्त्रार्थ सभा होगी, जिसमें विभिन्न विशिष्ट विद्वान अपनी शास्त्रीय ज्ञान परंपरा का उद्बोधन करेंगे। सांस्कृतिक आदान-प्रदान के अंतर्गत शाम 5 बजे सभी विशिष्ट अतिथि असी घाट का भ्रमण करेंगे।
दूसरे दिन (14 फरवरी) प्रातः 10 बजे प्रो. पतंजलि मिश्र (महानिदेशक) के नेतृत्व में मालवीय भवन का भ्रमण होगा। इसके बाद 10:30 बजे भारत कला भवन के निदेशक के नेतृत्व में भारत कला भवन का दौरा होगा।
तत्पश्चात् संकाय में प्रो. राजाराम शुक्ल की अध्यक्षता में दोपहर 11 बजे प्रो. शैलेश कुमार तिवारी के संयोजकत्व में संस्कृत कवि गोष्ठी आयोजित होगी, जिसमें विशिष्ट विद्वान अपनी स्वरचित संस्कृत कविताओं का पाठ करेंगे।
दिनांक 14 फरवरी 2026 को ही दोपहर 2:30 बजे पूज्य रमेशभाई ओझा जी के दिव्य सान्निध्य में समापन समारोह होगा। समापन के बाद शाम 5 बजे नेपाल से आए विद्वानों की माननीय कुलपति प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी से भेंट-वार्ता होगी।
नेपाल से आने वाले प्रमुख विद्वान-डॉ. माधव प्रसाद लामिछाने, डॉ. विश्वनाथ धिताल, डॉ. नारायण प्रसाद बराल, डॉ. रामप्रसाद पौडेल, डॉ. केशवशरण आर्याल, डॉ. भोलानारायण रेग्मी, डॉ. उपेन्द्र दाहाल, डॉ. लक्ष्मण आचार्य (सभी नेपाल संस्कृत विश्वविद्यालय से संबद्ध)।
यह आयोजन बीएचयू में अपनी तरह का पहला कार्यक्रम है। काशी में बड़ी संख्या में नेपाली छात्र विभिन्न पाठशालाओं, गुरुकुलों तथा विश्वविद्यालयों में संस्कृत शास्त्रों का अध्ययन कर रहे हैं। इस आयोजन में उनका भी समावेश किया गया है। यह दोनों देशों के बीच शास्त्रीय एवं सांस्कृतिक आदान-प्रदान को मजबूत करने में सेतु का कार्य करेगा।
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