वाराणसी , फरवरी 2 -- काशी हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) के कृषि विज्ञान संस्थान के आनुवंशिकी एवं पादप प्रजनन विभाग द्वारा 'क्लाइमेट रेजिलिएंट एग्रीकल्चर फॉर सस्टेनेबल डेवलपमेंट: इनोवेशन एंड सॉल्यूशंस' विषय पर अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन 5 से 7 फरवरी को स्वतंत्रता भवन में आयोजित किया जाएगा।

इस सम्मेलन में फिलीपींस स्थित अंतरराष्ट्रीय चावल अनुसंधान संस्थान (आईआरआरआई) तकनीकी सह-आयोजक के रूप में सहयोग कर रहा है। सम्मेलन के संयोजक एवं आनुवंशिकी एवं पादप प्रजनन विभाग के अध्यक्ष प्रो. श्रवण कुमार सिंह के अनुसार, इसका मुख्य उद्देश्य वैश्विक स्तर पर वैज्ञानिकों एवं नीति-निर्माताओं का ध्यान आकर्षित करना है कि जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों के बीच कृषि का सतत विकास कैसे सुनिश्चित किया जा सके।इरी की डॉ. स्वाती नायक सह-संयोजक हैं।

आयोजन सचिव डॉ. जे. जोर्बन ने सोमवार को बताया कि सम्मेलन में देश के 24 राज्यों के अलावा 4-5 अन्य देशों से 500 से अधिक वैज्ञानिक, शिक्षक, किसान उत्पादक संगठन के प्रतिनिधि, शोधार्थी एवं अन्य विशेषज्ञ भाग लेंगे। यह अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन विश्व के प्रमुख कृषि विशेषज्ञों, प्रख्यात वैज्ञानिकों, नीति-निर्माताओं, कृषि उद्यमियों, युवा शोधकर्ताओं तथा छात्रों के लिए 21वीं सदी की सबसे बड़ी चुनौती-जलवायु परिवर्तन-के संदर्भ में विश्व खाद्य एवं पोषण सुरक्षा पर विचार-विमर्श हेतु एक वैश्विक मंच प्रदान करेगा।

कृषि विज्ञान संस्थान के निदेशक प्रो. यू.पी. सिंह ने बताया कि सम्मेलन का उद्घाटन समारोह 5 फरवरी 2026 को सुबह 9:30 बजे होगा, जिसकी अध्यक्षता कुलपति प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी करेंगे। सम्मेलन का प्रमुख उद्देश्य जलवायु परिवर्तन की स्थिति में कृषि के सतत विकास के माध्यम से किसानों की आजीविका एवं आय में वृद्धि के लिए विभिन्न विषयों पर गहन चर्चा करना है।

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