वाराणसी , फरवरी 5 -- काशी हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) में गुरुवार को "सतत विकास के लिए जलवायु अनुकूल कृषि: नवाचार और समाधान 2026" विषय पर तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का शुभारंभ हुआ।
कृषि विज्ञान संस्थान के आनुवंशिकी एवं पादप प्रजनन विभाग द्वारा आयोजित इस सम्मेलन का तकनीकी सहयोग फिलीपींस स्थित अंतरराष्ट्रीय चावल अनुसंधान संस्थान ने किया है। इसमें देश-विदेश के वैज्ञानिक, शोधकर्ता, नीति-निर्माता और विद्यार्थी बड़ी संख्या में शामिल हुए।
उद्घाटन सत्र की अध्यक्षता करते हुए कुलपति प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी ने कहा कि जलवायु परिवर्तन का कृषि उत्पादन पर गंभीर प्रभाव पड़ रहा है, इसलिए प्रमाण-आधारित शोध और ठोस समाधान समय की आवश्यकता हैं। उन्होंने अंतर्विषयी सहयोग, नवाचार और स्थायी साझेदारी पर बल देते हुए कहा कि विश्वविद्यालयों का शोध समाज और किसानों के हित में उपयोगी सिद्ध होना चाहिए।
मुख्य अतिथि डॉ. हिमांशु पाठक, महानिदेशक, अंतरराष्ट्रीय अर्ध-शुष्क उष्णकटिबंधीय फसल अनुसंधान संस्थान, हैदराबाद ने कहा कि जलवायु परिवर्तन का सबसे अधिक असर गरीब और कमजोर समुदायों पर पड़ रहा है। उन्होंने खाद्य सुरक्षा और आजीविका की रक्षा के लिए सामूहिक प्रयासों, अनुकूलन और शमन की रणनीतियों को अपनाने की आवश्यकता बताई तथा निरंतर निवेश पर जोर दिया।
अंतरराष्ट्रीय चावल अनुसंधान संस्थान दक्षिण एशिया क्षेत्रीय केंद्र के निदेशक डॉ. सुधांशु सिंह ने कहा कि जलवायु परिवर्तन अब वास्तविक चुनौती बन चुका है। उन्होंने वैज्ञानिक शोध को नीतियों और निवेश योजनाओं से जोड़ने, नई कृषि तकनीकों तक समान पहुंच सुनिश्चित करने तथा उत्पादन अंतर को कम करने की आवश्यकता पर बल दिया। सम्मेलन के आगामी सत्रों में टिकाऊ कृषि और जलवायु अनुकूल तकनीकों पर विस्तार से चर्चा की जाएगी।
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