रांची , फरवरी 20 -- झारखंड के बिरला इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, मेसरा, रांची के प्रबंधन अध्ययन विभाग ने "डिजिटल युग में प्रबंधन की पुनर्परिभाषा: नए प्रतिमान, नवाचार, कार्यप्रणालियाँ और संभावनाएँ" शीर्षक से अपना अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन सफलतापूर्वक आयोजित किया।
केंद्रीय सभागार में आयोजित इस कार्यक्रम ने प्रतिष्ठित शिक्षाविदों, उद्योग जगत के अग्रणी व्यक्तियों और प्रशासकों को नवाचार-प्रेरित विकास के भविष्य तथा डिजिटल शासन की परिवर्तनकारी शक्ति पर विचार-विमर्श करने के लिए एक उच्चस्तरीय मंच प्रदान किया।
सम्मेलन का शुभारंभ केंद्रीय सभागार में पारंपरिक दीप प्रज्वलन समारोह के साथ हुआ, जिसका नेतृत्व कुलपति प्रोफेसर इंद्रनील मन्ना ने किया। उनके साथ मुख्य अतिथि अनन्या मित्तल (भारतीय प्रशासनिक सेवा, 2015 बैच), मुख्य कार्यकारी पदाधिकारी, जेएसएलपीएस, ग्रामीण विकास विभाग, झारखंड सरकार, तथा विशिष्ट अतिथि राजीव रंजन, सहायक उपाध्यक्ष एवं कोयला प्रबंधन समूह प्रमुख, जिंदल स्टील लिमिटेड उपस्थित रहे। वरिष्ठ संकाय सदस्यों में विभागाध्यक्ष प्रोफेसर संजय झा एवं आयोजन सचिव डॉ. सुजाता प्रियंबदा दास ने परिचय एवं स्वागत भाषण प्रस्तुत किया।
अपने स्वागत संबोधन में कुलपति प्रोफेसर इंद्रनील मन्ना ने विज्ञान और प्रौद्योगिकी के तीव्र विकास पर प्रकाश डाला, विशेष रूप से अंतरिक्ष और रॉकेट प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में हुई महत्वपूर्ण प्रगतियों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा, "डिजिटल हस्तक्षेप और नवाचार-आधारित अध्ययन दृष्टिकोण अब वैकल्पिक नहीं रहे; वे आधुनिक प्रबंधन की आधारशिला हैं।" उन्होंने इस सम्मेलन को वैश्विक स्तर पर क्रियात्मक प्रगति के लिए एक महत्वपूर्ण उत्प्रेरक बताया। उद्घाटन सत्र के दौरान 110 शोध-पत्रों सहित सार-संग्रह ग्रंथ का विमोचन भी किया गया।
मुख्य व्याख्यान देते हुए श्री मित्तल ने महिला सशक्तिकरण और पूर्वानुमान-आधारित शासन के दृष्टिकोण से "राष्ट्रीय रूपांतरण" विषय पर अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने आँकड़ा-आधारित प्रस्तुति के माध्यम से बताया कि किस प्रकार डिजिटल विस्तार ग्रामीण झारखंड के उत्थान में सहायक सिद्ध हो रहा है। 32 लाख महिलाएँ मिशन के नेटवर्क से जुड़ी हुई हैं। 3.20 लाख स्वयं सहायता समूह वर्तमान में सक्रिय हैं। 998 समूह-स्तरीय महासंघों को संरचित वित्तीय सहयोग प्राप्त हो रहा है। 120 कृषक उत्पादक संगठन ग्रामीण आर्थिक स्थिरता को सुदृढ़ बना रहे हैं।
श्री मित्तल ने बल दिया कि शासन प्रणाली प्रतिक्रियात्मक मॉडल से पूर्वानुमान-आधारित मॉडल की ओर अग्रसर हो रही है, जहाँ डिजिटल सुदृढ़ीकरण के माध्यम से योजना निर्माण और संसाधन वितरण को अधिक प्रभावी बनाया जा रहा है। उन्होंने "पालाश स्टोर" पहल की विशेष सराहना की, जो ग्रामीण महिला उद्यमियों को व्यावसायिक ब्रांड पहचान, भंडारण सुविधा और बाजार तक पहुँच उपलब्ध कराती है।
राजीव रंजन ने जिंदल समूह के साथ अपने दो दशकों से अधिक के अनुभव के आधार पर उपस्थित जनों से विकास-उन्मुख दृष्टिकोण अपनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा, "हम यहाँ क्रमिक सुधारों पर नहीं, बल्कि मूलभूत विकास पर चर्चा करने के लिए एकत्र हुए हैं।" उन्होंने कोयला और खनन जैसे भारी उद्योगों में मानवीय त्रुटियों को समाप्त करने तथा संसाधनों के इष्टतम उपयोग के लिए बुद्धिमान परिवहन व्यवस्था और प्रौद्योगिकी-सक्षम आपूर्ति श्रृंखला की आवश्यकता पर विस्तार से प्रकाश डाला।
प्रबंधन विभाग में आयोजित तकनीकी सत्रों के दौरान चर्चा के प्रमुख विषय निम्न रहे- उत्तर-डिजिटल विश्व में नवाचार-प्रेरित प्रबंधन, बुद्धिमान परिवहन व्यवस्था एवं आपूर्ति श्रृंखला का अनुकूलन, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और वस्तु-संयोजक प्रौद्योगिकी के साथ एकीकृत सतत विकास रणनीतियाँ, भावी नेतृत्वकर्ताओं को मुक्त और सशक्त बनाने के उद्देश्य से शैक्षिक सुधार।
सम्मेलन का समापन शैक्षणिक उत्कृष्टता और सामाजिक उत्तरदायित्व के सामूहिक संकल्प के साथ हुआ, जिसमें अध्यक्ष प्रोफेसर सुप्रियो रॉय, संयोजक डॉ. नीरज मिश्रा तथा संयुक्त संयोजक डॉ. सत्यजीत महतो की महत्वपूर्ण भूमिका रही। डिजिटल सिद्धांत और जमीनी व्यवहार के मध्य की दूरी को समाप्त करते हुए, बीआईटी मेसरा का प्रबंधन अध्ययन विभाग जटिल एवं परिवर्तनशील वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए भविष्य-तैयार पेशेवरों के निर्माण में अग्रणी भूमिका निभा रहा है। संयुक्त आयोजन सचिव डॉ. आनंद प्रसाद सिन्हा ने श्रोताओं के प्रति औपचारिक धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया।
प्रथम पूर्णाधिवेशन सत्र सिटी यूनिवर्सिटी ऑफ न्यूयार्क के मैनहैटन सामुदायिक महाविद्यालय (संयुक्त राज्य अमेरिका) की प्रोफेसर शमीरा सोरेन मालेकर द्वारा "भविष्य का निर्माण: प्रौद्योगिकी और उद्यमिता के संगम पर नवाचार" विषय पर संचालित किया गया। द्वितीय पूर्णाधिवेशन सत्र भारतीय प्रबंधन संस्थान, लखनऊ के प्रोफेसर देवाशीष दास गुप्ता द्वारा "डिजिटल युग में विपणन नेतृत्व की पुनर्परिभाषा" विषय पर आयोजित किया गया।
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