, April 29 -- मेला में भाग लेने वाले स्थानीय वेंडरों ने आश्वस्त किया कि आवेदन प्रक्रिया पूर्ण होने के बाद निर्धारित समय-सीमा के भीतर सोलर पैनलों का अधिष्ठापन सुनिश्चित किया जाएगा। साथ ही करारनामा अवधि के अंतर्गत 7 वर्षों तक निःशुल्क मरम्मत एवं रख-रखाव की सुविधा भी प्रदान की जाएगी।
जिला पदाधिकारी नितिन कुमार सिंह ने निर्देश दिये कि योजना का व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाए तथा अधिक बिजली खपत करने वाले उपभोक्ताओं को विशेष रूप से सोलर अपनाने के लिये प्रेरित किया जाए। उन्होंने कहा कि यह योजना न केवल बिजली बिल में कमी लाती है, बल्कि स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देकर ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
जिला पदाधिकारी ने बताया कि ऋण की अदायगी शहरी क्षेत्रों में 4 से 5 वर्ष तथा ग्रामीण क्षेत्रों में 7 से 8 वर्ष की अवधि में की जा सकती है, जिससे उपभोक्ताओं पर आर्थिक बोझ कम पड़ता है। उपभोक्ता अपनी बिजली खपत के अनुसार सोलर क्षमता का चयन कर सकते हैं। 150 यूनिट तक 1 किलोवाट, 300 यूनिट तक दो किलोवाट तथा उससे अधिक खपत पर तीन किलोवाट या अधिक क्षमता उपयुक्त है।सोलर पैनल से उत्पादित बिजली का उपयोग घरेलू कार्यों में किया जा सकता है तथा अतिरिक्त बिजली को ग्रिड में भेजकर बिल में समायोजन की सुविधा भी उपलब्ध है, जिससे उपभोक्ताओं को अतिरिक्त आर्थिक लाभ प्राप्त होता है। प्रति किलोवाट लगभग 100 वर्गफुट छत की आवश्यकता होती है तथा उचित रख-रखाव के साथ सोलर पैनल लगभग 25 वर्षों तक सुचारु रूप से कार्य करते हैं।
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