पटना , फरवरी 03 -- बिहार सरकार ने मंगलवार को कहा कि वह शिक्षक स्थानांतरण नीति पर पुनर्विचार कर रही है।

बिहार विधानसभा की पूर्वाह्न बैठक में विधायक संदीप सौरभ के तारांकित प्रश्न का उत्तर देते हुए शिक्षा मंत्री सुनील कुमार ने सदन को बताया कि राज्य सरकार शिक्षक स्थानांतरण नीति की समीक्षा कर रही है। उन्होंने आपसी (म्यूचुअल) स्थानांतरण के लिए पोर्टल को फिर से खोले जाने के संकेत दिए। उन्होंने कहा कि नीतीश सरकार शिक्षकों के स्थानांतरण की पूरी प्रक्रिया की समीक्षा कर रही है, जिसमें आपसी सहमति से स्थानांतरण के साथ-साथ सामान्य स्थानांतरण भी शामिल हैं।उन्होंने स्पष्ट किया कि टीआरई-1 और टीआरई-2 के तहत नियुक्त शिक्षकों को पहले से ही स्थानांतरण का विकल्प उपलब्ध है, जबकि टीआरई-3 के तहत नियुक्त शिक्षकों का स्थानांतरण उनका प्रोबेशन अवधि पूरी होने के बाद शुरू होगा।

विधायक संदीप सौरभ ने पूरक प्रश्नों के माध्यम से सवाल उठाया कि आपसी स्थानांतरण का पोर्टल अचानक क्यों बंद कर दिया गया और दूरदराज जिलों में पदस्थापित शिक्षकों को राहत क्यों नहीं दी गई। उन्होंने बताया कि टीआरई -3 के तहत नियुक्त कई शिक्षकों की पोस्टिंग उनके गृह जिलों से 300 से 500 किलोमीटर दूर की गई है। इनमें बड़ी संख्या महिला शिक्षकों की है, जिनके लिए पारिवारिक और सामाजिक जिम्मेदारियों के कारण इतनी दूर सेवा देना कठिन हो गया है।

श्री सौरभ ने इस स्थिति को प्रशासनिक असंवेदनशीलता बताते हुए सरकार से मांग की कि स्थानांतरण प्रक्रिया को तत्काल बहाल किया जाए और आपसी स्थानांतरण का विकल्प फिर से खोला जाए।

इस बीच, अन्य सदस्यों के तारांकित प्रश्नों के उत्तर में मंत्री ने सदन को बताया कि बेहतर शैक्षणिक सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए सरकार चरणबद्ध तरीके से प्रत्येक प्रखंड में डिग्री कॉलेज खोल रही है।

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