, May 5 -- गौरतलब है कि मुंगेर सुल्तानगंज गंगा पथ परियोजना गंगा नदी के समानांतर सफियाबाद (मुंगेर) से सुल्तानगंज (भागलपुर) तक एक 4 लेन एलिवेटेड एवं एट-ग्रेड कॉरिडोर के निर्माण से संबंधित है। परियोजना की कुल लंबाई 42.0 किमी है, जिसमें लगभग 30.12 किमी एट-ग्रेड तथा 11.88 किमी एलिवेटेड सम्मिलित हैं। यह परियोजना हाइब्रिड एन्यूटी मॉडल के अंतर्गत विकसित की जा रही है, जिसकी कुल अनुबंध लागत 5327.00 करोड़ है।
इस मॉडल में सरकार द्वारा 40 प्रतिशत एवं निजी डेवलपर की ओर से 60 प्रतिशत निवेश किया जाता है, जिससे परियोजना के वित्तीय जोखिम का संतुलित वितरण सुनिश्चित होता है। परियोजना की निर्माण अवधि चार वर्ष निर्धारित है। यह कॉरिडोर गंगा नदी के किनारे उच्च गति एवं निर्बाध यातायात सुविधा प्रदान करने के उद्देश्य से विकसित किया जा रहा है, जिससे मुंगेर एवं भागलपुर के बीच क्षेत्रीय संपर्क में उल्लेखनीय सुधार होगा। साथ ही, यह परियोजना मौजूदा मार्गों पर यातायात दबाव को कम करेगी तथा पर्यटन, धार्मिक स्थलों तक पहुँच एवं नदी तट विकास को बढ़ावा देगी।
परियोजना में 4 लेन डिवाइडेड कैरिजवे का प्रावधान है, जिसकी कुल चौड़ाई 27.0 मीटर है, जिसमें दोनों दिशाओं में 7.0 मीटर चौड़ी मुख्य सड़क, 5.0 मीटर मध्य पट्टी, 2.5 मीटर पक्का कंधा तथा 1.5 मीटर कच्चा कंघा शामिल है। एट-ग्रेड खंडों के लिए राइट ऑफ वे 45 मीटर से 100 मीटर तक तथा एलिवेटेड खंडों के लिए 30 मीटर निर्धारित किया गया है। एलिवेटेड मार्ग को विशेष रूप से घनी आबादी वाले क्षेत्रों, घाटों, धार्मिक स्थलों एवं भीड़भाड़ वाले स्थानों पर प्रस्तावित किया गया है, जिससे भूमि अधिग्रहण में कमी आए तथा यातायात सुगमता बनी रहे। समग्र रूप से, यह परियोजना एक महत्वपूर्ण अवसंरचना पहल है, जो क्षेत्र में यातायात की गति, सुरक्षा एवं दक्षता में सुधार करेगी, यात्रा समय एवं लागत को कम करेगी तथा पर्यटन, आर्थिक विकास एवं गंगा नदी तट के समेकित विकास को प्रोत्साहित करेगी।
इसके साथ ही सुल्तानगंज-भागलपुर-सबौर गंगा पथ परियोजना गंगा नदी के समानांतर सुल्तानगंज से सबौर (भागलपुर) तक एक 4 लेन एलिवेटेड एवं एट-ग्रेड कॉरिडोर के निर्माण से संबंधित है। परियोजना की कुल लंबाई 41.33 किमी है, जिसमें लगभग 30.77 किमी एट-ग्रेड तथा 10. 56 किमी एलिवेटेड सम्मिलित हैं। इसके एलाइनमेंट में 34 घाट हैं, जिन्हें विकसित किया जायेगा। यह परियोजना हाइब्रिड एन्यूटी मॉडल के अंतर्गत विकसित की जा रही है। इस मॉडल में सरकार द्वारा 40 प्रतिशत एवं निजी डेवलपर द्वारा 60 प्रतिशत निवेश किया जाता है, जिससे परियोजना के वित्तीय जोखिम का संतुलित वितरण सुनिश्चित होता है।
परियोजना की निर्माण अवधि 4 वर्ष निर्धारित है। यात्रियों की सुविधा हेतु परियोजना में 5 टोल प्लाजा, बस बे, ट्रक ले-बाय, व्यू पॉइंट एवं अगुवानी घाट के निकट लगभग 2000 वर्ग मीटर का विश्राम क्षेत्र प्रस्तावित है। परियोजना के लिए लगभग 699.06 एकड़ भूमि की आवश्यकता है, जिसमें 43 मोजा/वार्ड एवं 2106 प्लॉट शामिल है। भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया प्रगति पर है।
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