, Jan. 28 -- शैक्षणिक उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए कुलपति ने बताया कि बीते वर्ष विश्वविद्यालय में 95 शैक्षणिक कार्यक्रम आयोजित किए गए, जो पिछले वर्ष की तुलना में लगभग दोगुने हैं। मैथिली और राजनीति विज्ञान विभाग द्वारा शोध-पत्रिका एवं पुस्तकों का प्रकाशन सराहनीय है। एमबीए विभाग के 33 छात्रों का विभिन्न निजी संस्थानों में प्लेसमेंट हुआ है।नामांकन के आंकड़े भी उत्साहजनक रहे। स्नातक प्रथम सेमेस्टर में 1.61 लाख से अधिक तथा स्नातकोत्तर प्रथम सेमेस्टर में लगभग 17 हजार छात्रों ने नामांकन लिया। वर्ष 2024 में 507 शोधार्थियों को पीएचडी की उपाधि प्रदान की गई, जो एक रिकॉर्ड है।

कुलपति प्रोफेसर चौधरी ने कहा कि फॉरेंसिक विज्ञान, साइबर कौशल विकास, विदेशी भाषा विस्तार केंद्र, बी.पी.एड. एकीकृत पाठ्यक्रम सहित कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों को मंजूरी दी गई है। खेलकूद के क्षेत्र में भी विश्वविद्यालय की टीमों ने राष्ट्रीय और क्षेत्रीय स्तर पर उल्लेखनीय सफलता हासिल की है।

बैठक में सीनेटर प्रोफेसर अजीत कुमार चौधरी ने कक्षाओं में छात्रों के घटती संख्या पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि छात्रों की शत प्रतिशत उपस्थित वर्गों में हो इसके लिए विशेष रूप से स्थायी कदम उठाए जाएं तभी शिक्षण संस्थाओं का महत्व बरकरार रहेगा। इसे संजीदगी से लेते हुए कुलपति ने सभी अधिषद एवं अभिषद सदस्यों से कक्षाओं में छात्रों के उपस्थिति के लिए छात्राओं के बीच जाकर जागरूकता अभियान चलाने का अनुरोध किया और बताया कि छात्रों में विश्वविद्यालय की खोई हुई प्रतिष्ठा वापस लाने के लिए शिक्षकों को छात्रों में विश्वास पैदा करना होगा। उन्होंने कहा कि अब शिक्षकों की संख्या में काफी सुधार हुआ है।

इस बैठक में वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए लगभग 13 अरब 49 करोड़ रुपए घाटे का बजट पारित कर राज्य सरकार को अनुदान के लिए भेजने का निर्णय लिया गया। विश्वविद्यालय के वित्तीय परामर्शी डॉ. इंद्र कुमार ने सीनेट की बैठक में वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए बजट का प्रस्ताव रखा। उन्होंने बताया कि वित्तीय वर्ष 2026-27 में एक अरब 81 करोड़ 29 लाख 16 हजार 836 रूपया आंतरिक श्रोत से आय का अनुमान है, जबकि 15 अरब 29 करोड़ 73 लाख 33 हजार 652 रुपया व्यय का अनुमान है।

हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित