पटना , फरवरी 2 -- बिहार विधानमंडल के बजट सत्र के पहले दिन सोमवार को राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान के अभिभाषण और शोक प्रस्ताव के बाद दोनों सदनों की कार्यवाही कल तक के लिए स्थगित कर दी गयी।
राज्यपाल श्री खान के अभिभाषण और सूचीबद्ध कार्यों को प्राप्त करने तथा हाल की अवधि में दिवंगत हुए सदस्यों को श्रद्धांजलि (शोक प्रस्ताव) देने के पश्चात आज बिहार विधानमंडल की कार्यवाही को कल के लिए स्थगित कर दी गई।
राज्यपाल ने आज संयुक्त सत्र को संबोधित करते हुए भविष्य में सरकार की रणनीतियों की रूपरेखा प्रस्तुत की और उसकी उपलब्धियों व कार्यों का विस्तार से उल्लेख किया।
संयुक्त सत्र के बाद विधान परिषद (उच्च सदन) और विधानसभा (निचले सदन) की अलग-अलग बैठकें हुईं, जिनमें दोनों सदनों के पीठासीन अधिकारियों के नामों की घोषणा की गई तथा बजट सत्र के लिए कार्यमंत्ररणा समिति का गठन किया गया। इस दौरान वित्तीय वर्ष 2025-26 का आर्थिक सर्वेक्षण दोनों सदनों में अलग-अलग पटल पर रखा गया।
बिहार विधानसभा अध्यक्ष प्रेम कुमार ने इससे पहले सदन के सदस्यों का स्वागत करते हुए उनसे सदन की गरिमा बनाए रखने और जनहित से जुड़े मुद्दों के समाधान के लिए सहयोग करने की अपील की। उन्होंने कहा कि एक महीने तक चलने वाले बजट सत्र में कुल 19 बैठकें होंगी, जिनके दौरान प्रत्येक विभाग का बजट पारित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि आम जनता के मुद्दों और प्राथमिकताओं पर रणनीति बनाना सदस्यों की सर्वोच्च जिम्मेदारी है। उन्होंने उम्मीद जताई कि सभी मिल कर महत्वपूर्ण मुद्दों पर निर्णय लेते समय अपनी रचनात्मक भूमिका निभाएंगे। उन्होंने यह भी उम्मीद जताई कि सदस्य अनुशासन में रहते हुए तथा सदन के नियमों व प्रक्रियाओं का पालन करते हुए कार्यवाही को सुचारु रूप से चलाने में सहयोग करेंगे।
बिहार विधान परिषद के सभापति अवधेश नारायण सिंह ने अपने स्वागत भाषण में सदस्यों से सदन की गरिमा बनाए रखने और अपने दायित्वों का निर्वहन करने की अपील की। उन्होंने कहा कि 19 निर्धारित बैठकों वाले इस सत्र में जनहित और विकास से जुड़े मुद्दों पर सार्थक चर्चा होगी।
श्री सिंह ने 86वें अखिल भारतीय पीठासीन अधिकारी सम्मेलन का उल्लेख करते हुए कहा कि लोकतंत्र में सार्वजनिक मुद्दों पर विचार-विमर्श के लिए विधानमंडल सबसे उपयुक्त मंच हैं। उन्होंने सदस्यों से जनता की समस्याओं के समाधान के लिए सत्र का प्रभावी उपयोग करने का आग्रह किया।
सभापति ने कहा कि मुख्यमंत्री लगातार विकास कार्यों की समीक्षा कर रहे हैं और इससे विकास की गति तेज हुई है। उन्होंने कहा कि यह सुनिश्चित हुआ है कि विकास दूर-दराज के गांवों और टोलों तक पहुंचे। उन्होंने कहा कि 'सात निश्चय-3 (2025-2030) तैयार करने का निर्णय न्याय के साथ विकास के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
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