, April 10 -- श्री सिन्हा ने कहा कि अधिसूचना जारी होने के बाद यदि किसी पक्ष को उत्तर प्रदेश में स्थित बेतिया राज की संपत्तियों को लेकर आपत्ति होती है, तो वह निर्धारित प्रक्रिया के तहत सचिव, राजस्व पर्षद के समक्ष आवेदन कर सकेगा। विशेष अधिकारी को वही अधिकार प्राप्त होंगे जो बिहार के मामलों में विशेष पदाधिकारी को दिए गए हैं। वे नियमानुसार आपत्तियों का निपटारा करेंगे।
उपमुख्यमंत्री ने बताया कि यदि किसी अधिभोगी द्वारा संबंधित संपत्ति को पूर्ण स्वामित्व में परिवर्तित कराने का आवेदन दिया जाता है, तो सचिव, उत्तर प्रदेश के संबंधित जिला समाहर्ता से उस संपत्ति की पूर्ण स्वामित्व राशि निर्धारित करने का अनुरोध करेंगे। समाहर्ता की ओर से निर्धारित राशि यदि राजस्व परिषद को स्वीकार्य होगी, तो उसी आधार पर आगे की प्रक्रिया संचालित की जाएगी।उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यदि अधिभोगी निर्धारित राशि जमा नहीं करता है, तो सचिव संबंधित जिले के समाहर्ता से अनुरोध करेंगे कि उत्तर प्रदेश के लागू कानूनों के अनुसार अधिभोगी को बेदखल कर संपत्ति का कब्जा राजस्व पर्षद को सौंप दिया जाए।
श्री सिन्हा ने कहा कि इस नई व्यवस्था का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि बिहार के बाहर, विशेषकर उत्तर प्रदेश में स्थित बेतिया राज की संपत्तियों का भी कानूनी, पारदर्शी और समन्वित तरीके से प्रबंधन हो सके। इससे लंबे समय से लंबित विवादों के समाधान का मार्ग प्रशस्त होगा और संपत्तियों के उपयोग में स्पष्टता आएगी।
हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित