, April 9 -- श्री सिन्हा ने कहा कि 01 जनवरी 1986 के बाद कब्जा करने वाले अतिक्रमणकारियों के भवन को कमांडियर किया जा सकेगा तथा उनके विरुद्ध विधिसम्मत कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि जिन मामलों में कोई वैध दस्तावेज या दीर्घकालिक कब्जे का प्रमाण नहीं मिलेगा, उन्हें अनधिकृत अधिभोगी मानते हुए बिहार लोक भूमि अतिक्रमण अधिनियम, 1956 के तहत बेदखली की प्रक्रिया अपनाई जाएगी।

उपमुख्यमंत्री ने कहा कि बेतिया राज की कई संपत्तियाँ ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व की हैं। ऐसी विरासत संपत्तियों के संरक्षण, नवीकरण और सुरक्षा के लिए विशेषज्ञों और पुरातात्विक संस्थानों की तकनीकी सहायता ली जाएगी, ताकि उनकी ऐतिहासिक पहचान सुरक्षित रह सके।

श्री सिन्हा ने कहा कि इस नियमावली से बेतिया राज की संपत्तियों के प्रबंधन में पारदर्शिता, विधिक व्यवस्था और जनहित का संतुलन स्थापित होगा तथा राज्य की बहुमूल्य संपत्तियों का बेहतर उपयोग विकास कार्यों में किया जा सकेगा। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि नियमावली के प्रावधानों के अनुरूप सभी आवश्यक प्रशासनिक तैयारियाँ सुनिश्चित की जाएँ, जिससे अधिनियम और नियमों का प्रभावी क्रियान्वयन हो सके जिससे राज्य की संपत्तियों की सुरक्षा तथा उनका समुचित उपयोग सुनिश्चित हो।

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