, Jan. 11 -- फार्मर्स रजिस्ट्रेशन में 100 प्रतिशत या उससे अधिक उपलब्धि प्राप्त करने वाले जिलों में मुजफ्फरपुर, वैशाली, अररिया, भागलपुर एवं कटिहार जैसे जिले प्रमुख रूप से शामिल हैं। ये सभी रिविज़नल सर्वे से आच्छादित हैं। इन जिलों में भूमि अभिलेखों की स्पष्टता के कारण फार्मर्स रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया में न्यूनतम बाधाएँ सामने आ रही हैं।वहीं पूर्वी चंपारण, जहानाबाद, पटना, लखीसराय एवं मुंगेर जैसे कैडस्ट्रल सर्वे प्रधान जिलों में फार्मर्स रजिस्ट्रेशन की गति अपेक्षाकृत धीमी पाई गई है। इन जिलों में उत्तराधिकार के लंबित मामलों, संयुक्त जोत, भू-खण्डों के अत्यधिक विखंडन तथा पुराने एवं त्रुटिपूर्ण अभिलेखों के कारण रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया में अतिरिक्त समय लग रहा है।

राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने यह स्पष्ट किया गया है कि यह स्थिति प्रशासनिक शिथिलता का परिणाम नहीं, बल्कि पुरानी एवं संरचनात्मक अभिलेखीय चुनौतियों के कारण उत्पन्न हुई है। आठ ने नौ जनवरी के बीच जिलों की रैंकिंग में हुए परिवर्तन से भी यही प्रवृत्ति दिखती है। कैमूर, भोजपुर, भागलपुर एवं वैशाली जैसे आरएस जिलों में उल्लेखनीय रैंकिंग में सुधार दर्ज किया गया है, जबकि नालंदा, पटना, जहानाबाद एवं जमुई जैसे सीएस जिलों में रैंकिंग में ठहराव अथवा गिरावट देखी जा रही है।

एग्रीस्टैक प्रणाली में फार्मर्स रजिस्ट्रेशन के लिए साफ भू-खण्ड, स्पष्ट स्वामित्व एवं न्यूनतम मैनुअल हस्तक्षेप आवश्यक है। यह रिविजनल सर्वे वाले जिलों में अपेक्षाकृत सहज रूप से उपलब्ध हैं।इसी के दृष्टिगत विभाग द्वारा निर्णय लिया गया है कि जिलों में फार्मर्स रजिस्ट्रेशन को गति देने के लिए अतिरिक्त मानव संसाधन लगाकर परिमार्जन और दाखिल-खारिज के साथ मौजूदा ई-केवाईसी के प्रभावी कन्वर्जन पर विशेष बल दिया जाएगा।साथ ही, यह भी स्पष्ट किया गया है कि आरएस जिलों के लिए आक्रामक लक्ष्य यथार्थपरक हैं, जो राज्य स्तर पर समग्र उपलब्धि सुनिश्चित करने में सहायक सिद्ध होंगे।

यह स्पष्ट है कि राज्य में एग्रीस्टैक के अंतर्गत फार्मर्स रजिस्ट्रेशन का प्रदर्शन कैडस्ट्रल सर्वे एवं रिविजनल सर्वे की संरचना से प्रत्यक्ष रूप से जुड़ा हुआ है।

जहाँ आरएस जिले क्रियान्वयन के लिए अधिक अनुकूल हैं, वहीं सीएस जिलों में दशकों पुरानी अभिलेखीय विरासत के कारण प्रक्रिया अपेक्षाकृत अधिक समय ले रही है।यहां जोत में सुधार को राज्य सरकार चुनौती मानते हुए उसमें सुधार के उपाय में जुटी है।

कुल पंजीकरण संख्या के आधार पर मुजफ्फरपुर जिला 75,568 पंजीकरण के साथ राज्य में शीर्ष स्थान पर है। इसके बाद वैशाली (60,697), कटिहार (58,611), पूर्णिया (56,030) और भागलपुर (55,314) जैसे आरएस जिले अग्रणी हैं। अररिया, गया और सीतामढ़ी ने भी 45 हजार से अधिक पंजीकरण कर उल्लेखनीय प्रदर्शन किया। वहीं आरएस पार्शियल श्रेणी में समस्तीपुर (35,767), सुपौल (33,185) और बांका (30,174) ने अच्छी प्रगति दर्ज की। सीएस जिलों में पूर्वी चंपारण (51,145), दरभंगा (44,834), बेगूसराय (41,932) और नालंदा (38,146) की संख्या तक पहुंचा है। कुछ सीएस जिलों जैसे अरवल, जहानाबाद और लखीसराय में फार्मर्स रजिस्ट्रेशन की संख्या अपेक्षाकृत कम है।

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