, March 14 -- कार्यक्रम के दौरान नाबार्ड, डेयरी, मत्स्य एवं पशु संसाधन एवं सिडबी के अधिकारियों ने बताया कि वे कैसे किसानों एवं किसान उत्पादक संगठनों की मदद करते हैं जिससे वे बिहार को विकास के पथ पर आगे ले जा सकें।
कार्यक्रम के दौरान कृषि क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान देने वाले व्यक्तियों और संस्थाओं को विभिन्न श्रेणियों में सम्मानित भी किया गया। इनमें जलवायु-अनुकूल कृषि चैंपियन, सतत जल प्रबंधन अग्रदूत, मृदा स्वास्थ्य एवं सतत खेती पुरस्कार, एफपीओ उत्कृष्टता पुरस्कार, युवा कृषि उद्यमी पुरस्कार, वर्ष का एग्रीटेक स्टार्टअप, प्रगतिशील किसान पुरस्कार और स्वदेशी खाद्य विरासत पुरस्कार शामिल थे। इन पुरस्कारों के माध्यम से कृषि क्षेत्र में नवाचार, टिकाऊ खेती, जल और मिट्टी संरक्षण तथा किसानों के सशक्तिकरण के लिए किए जा रहे महत्वपूर्ण प्रयासों को प्रोत्साहित किया गया।
कार्यक्रम में यह संदेश दिया गया कि यदि सरकार, वैज्ञानिक संस्थान, उद्योग जगत और किसान मिलकर सतत कृषि की दिशा में कार्य करें, तो बिहार और झारखंड के कृषि क्षेत्र को अधिक मजबूत, टिकाऊ और समृद्ध बनाया जा सकता है।
इस कार्यक्रम में डॉ. जितेंद्र गुप्ता ,सचिव, बिहार सरकार, डॉ. विवेकानंद पांडेय, कुलपति, एमिटी विश्वविद्यालय; श्रीमती अनुभा प्रसाद, महाप्रबंधक, सिडबी; राजेश कुमार, कृभको; लक्ष्मण कुमार,नाबार्ड; विनय चौधरी, डेयरी डायरेक्टर सहित कई कृषि वैज्ञानिकों, विशेषज्ञों और प्रगतिशील किसानों ने अपने विचार रखे।
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