, Jan. 23 -- पत्र में यह भी कहा गया है कि प्रमंडलीय आयुक्त अपने-अपने क्षेत्र में समाहर्ता द्वारा पारित आदेशों के अपीलीय प्राधिकार हैं और वे राजस्व न्यायालयों के आदेशों का अनुश्रवण कर अनुपालन सुनिश्चित करेंगे, जिससे राजस्व न्यायालयों की गरिमा और न्यायिक अनुशासन बना रहे।

निर्देशों के अनुसार, किसी भी वरीय राजस्व न्यायालय का आदेश आरसीएमएस पोर्टल पर प्रदर्शित होने के बाद अंचल अधिकारी को सात दिनों के भीतर उसका अनुपालन करना अनिवार्य होगा। यदि आदेश के अनुपालन में सरकारी भूमि या सरकार का हित सन्निहित हो, तो उसे सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाएगी। आदेश की अवहेलना की स्थिति में संबंधित अंचल अधिकारी को पूर्णतः जवाबदेह माना जाएगा।इसके साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया है कि अंचल में सरकारी भूमि के संरक्षण और सुरक्षा की पूर्ण जिम्मेदारी अंचल अधिकारी की होगी। सरकारी भूमि से संबंधित मामलों में जिला समाहर्ता की पूर्व अनुमति के बिना किसी निम्न राजस्व न्यायालय के आदेश के आधार पर राजस्व अभिलेखों में प्रविष्टि नहीं की जाएगी।

प्रधान सचिव ने कहा कि वरीय न्यायालयों के आदेशों की अवज्ञा न्यायिक अनुशासन का उल्लंघन है और यह संवैधानिक शासन व्यवस्था (अनुच्छेद-14) तथा राजस्व न्यायिक प्रणाली के प्रतिकूल है। ऐसे कृत्य को गंभीर प्रशासनिक कदाचार मानते हुए दोषी अधिकारियों के विरुद्ध विभागीय कार्रवाई की जाएगी।सभी अंचल अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि वे अपर समाहर्ता, भूमि सुधार उप समाहर्ता एवं अन्य उच्चतर राजस्व न्यायालयों के आदेशों का पूर्ण अनुपालन सुनिश्चित करें, आदेश के अनुपालन की प्रमाणिक रिपोर्ट आरसीएमएस पोर्टल के माध्यम से सक्षम पदाधिकारी (समाहर्ता) को भेजें तथा आदेशानुसार राजस्व अभिलेखों में आवश्यक प्रविष्टि करें।

उपमुख्यमंत्री और राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने कहा कि वरीय राजस्व न्यायालयों के आदेशों की अवहेलना अथवा जानबूझकर विलंब किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने कहा कि सभी स्तर के राजस्व अधिकारियों को अपने वरीय अधिकारियों के आदेश का पालन समय सीमा में करना अनिवार्य है। आरसीएमएस पोर्टल पर आदेश प्रदर्शित होते ही उसका अनुपालन सात दिनों के भीतर अनिवार्य रूप से किया जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकारी भूमि एवं सरकार के हित से जुड़े मामलों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाएगी। न्यायिक अनुशासन का उल्लंघन गंभीर प्रशासनिक कदाचार है और दोषी अंचल अधिकारियों के विरुद्ध कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।

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