, April 27 -- पूर्वानुमान और बढ़ते तापमान को देखते हुए मुख्य सचिव ने संबंधित विभागों और जिलाधिकारियों को निर्देश जारी किए। हीट वेव और कम बारिश की स्थिति में भू-जल स्तर गिरने की संभावना को देखते हुए लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग को सभी चापाकलों और नल-जल योजनाओं की चालू स्थिति सुनिश्चित करने को कहा गया है। लू से होने वाली बीमारियों और 'सनस्ट्रोक' के मामलों से निपटने के लिए सभी अस्पतालों में विशेष वार्ड और दवाओं की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने का निर्देश दिये गये हैं। जिलाधिकारियों को निर्देश दिया गया कि वे लगातार सिवल सर्जिन के साथ बैठक करें। बिहार मौसम सेवा केंद्र के ऐप और अन्य माध्यमों से किसानों और आम जनता तक सटीक मौसम पूर्वानुमान पहुँचाने के लिए व्यापक अभियान चलाने का निर्देश दिये गये।
मुख्य सचिव ने कहा कि अगले एक सप्ताह (27 अप्रैल से 05 मई) तक तापमान और बारिश के पैटर्न पर चौबीसों घंटे निगरानी रखी जाए और किसी भी आपात स्थिति के लिए आपदा प्रबंधन विभाग को तैयार रखा जाए।गर्मी के कारण बढ़ते लोड के बावजूद राज्य में निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित की जाए। विशेष रूप से जलापूर्ति योजनाओं (नल-जल) के पंप चलाने के लिए प्राथमिकता के आधार पर बिजली दी जाए। लू के दौरान ट्रांसफार्मर जलने या तार टूटने की शिकायतों पर त्वरित कार्रवाई के लिये हर प्रमंडल में विशेष 'क्विक रिस्पांस टीम' तैनात की जाए। तकनीकी खराबी को न्यूनतम समय में ठीक करने का लक्ष्य रखें।
लू की स्थिति में पशुओं को 'हीट स्ट्रोक' से बचाने के लिए सभी पशु चिकित्सालयों में जीवन रक्षक दवाओं और ओआरएस का पर्याप्त स्टॉक रखा जाए। पशुओं के पीने के पानी के लिए सार्वजनिक हौदों और तालाबों में पानी की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिये स्थानीय प्रशासन के साथ मिलकर कार्य करें। जहाँ आवश्यकता हो, वहां टैंकरों के माध्यम से पशुओं के लिए पानी पहुँचाया जाए।
हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित