पटना , अप्रैल 09 -- बिहार सरकार के कला एवं संस्कृति विभाग की ओर से गुरूवार को मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत की अध्यक्षता में "ज्ञान भारतम् मिशन" के अंतर्गत राज्य में पाण्डुलिपियों के संरक्षण एवं डिजिटलीकरण की प्रगति की समीक्षा के लिये जिला पदाधिकारियों के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई।
भारत सरकार की ओर से वर्ष 2025-26 के बजट में घोषित यह फ्लैगशिप योजना देश की समृद्ध ज्ञान परंपरा और बौद्धिक विरासत को पुनर्जीवित करने की एक महत्वाकांक्षी पहल है। इस मिशन का मुख्य उद्देश्य भारत की विशाल पाण्डुलिपि विरासत का व्यापक सर्वेक्षण, वैज्ञानिक संरक्षण और आधुनिक डिजिटलीकरण करना है, ताकि हमारी प्राचीन धरोहर को सुरक्षित रखा जा सके।
मिशन के तहत उन सभी हस्तलिखित ग्रंथों को पाण्डुलिपि की श्रेणी में रखा गया है जो कम से कम 75 वर्ष प्राचीन हैं और जिन्हें कागज, भोजपत्र, ताड़पत्र, कपड़े या धातु आदि पर लिखा गया है। राज्य के विभिन्न सरकारी एवं गैर-सरकारी संस्थानों, मठों, मंदिरों, शैक्षणिक संस्थानों और निजी पुस्तकालयों में उपलब्ध इन दुर्लभ धरोहरों की पहचान और कैटलॉगिंग का कार्य युद्ध स्तर पर किया जा रहा है। पाण्डुलिपियों के सुरक्षित भविष्य के लिए पारंपरिक और वैज्ञानिक दोनों विधियों का उपयोग किया जा रहा है। साथ ही, एआई-आधारित तकनीकों और क्लाउड सिस्टम के माध्यम से एक राष्ट्रीय डिजिटल रिपॉजिटरी का निर्माण किया जा रहा है, जिससे इन दुर्लभ ग्रंथों का संपादन, अनुवाद और प्रकाशन कर उन्हें बहुभाषीय रूप में उपलब्ध कराया जा सके।
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