पटना , फरवरी 23 -- बिहार सरकार इस प्रस्ताव पर गंभीरता से विचार कर रही है कि मुखिया की तरह वार्ड सदस्यों को भी अपने- अपने वार्ड में पांच लाख रुपये तक के विकास कार्यों की स्वीकृति और क्रियान्वयन का वित्तीय अधिकार दिया जाये।

ग्रामीण विकास मंत्री श्रवण कुमार ने सोमवार को यह जानकारी बिहार विधान परिषद में दी। मंत्री श्री कुमार राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के विधान पार्षद सौरभ कुमार के अल्पसूचित प्रश्न का उत्तर दे रहे थे, जो वार्ड सदस्यों को प्रशासनिक राशि खर्च करने के अधिकार से संबंधित था।

उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार इस विषय के सभी पहलुओं की समीक्षा कर रही है और आवश्यक होने पर निर्णय लिया जायेगा।

मंत्री श्री कुमार ने बताया कि वर्तमान में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के तहत 10 लाख रुपये तक की योजनाओं की प्रशासनिक स्वीकृति की शक्ति ग्राम पंचायत को प्राप्त है। मनरेगा की वार्षिक कार्य योजना में योजनाओं की संख्या के चयन पर अधिकतम सीमा का कोई बंधन नहीं है।

उन्होंने कहा कि मनरेगा के अंतर्गत सघन सहभागिता नियोजन अभ्यास के माध्यम से वार्ड सभा और ग्राम सभा की ओर से कार्यों का चयन और अनुमोदन किया जाता है। साथ ही मुखिया के कार्यों की समीक्षा के दौरान वार्ड सदस्यों को भी सीमित वित्तीय अधिकार देने के प्रस्ताव पर विचार किया जायेगा।

राजद के सौरभ कुमार के तारांकित प्रश्न के जवाब में ग्रामीण विकास मंत्री श्रवण कुमार ने कहा कि राज्य में मनरेगा के तहत कृषि और कृषि संबद्ध कार्यों का प्रभावी क्रियान्वयन किया जा रहा है।

उन्होंने बताया कि मनरेगा की स्वीकृत 266 प्रकार की योजनाओं में 150 कार्य कृषि और उससे जुड़े क्षेत्रों से संबंधित हैं। भूमि विकास जैसे कार्य गैर- खेती योग्य भूमि को खेती योग्य बनाने के उद्देश्य से कराये जाते हैं। इन योजनाओं के माध्यम से एक ओर अकुशल मजदूरों को रोजगार मिलता है, वहीं दूसरी ओर किसानों के लिये उपयोगी परिसंपत्तियों का सृजन भी होता है।

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