पटना , फरवरी 15 -- भगवान शंकर की अराधना का पर्व महाशिवरात्रि बिहार में धूमधाम के साथ मनाया जा रहा है।
महाशिवरात्रि को भगवान शिव की पूजा करने का सबसे बड़ा दिन माना जाता है। महाशिवरात्रि हिन्दू परंपरा का एक बहुत बड़ा पर्व है। सालभर भक्त इस त्योहार की प्रतीक्षा करते हैं। कहा जाता है कि इस दिन भगवान शिव का मां पार्वती के साथ विवाह हुआ था। माना जाता है कि शिवरात्रि के दिन भगवान शिव और देवी पार्वती की पूजा करने से कष्टों से भी मुक्ति मिलती है।
देवाधिदेव महादेव और माता पार्वती को समर्पित महाशिवरात्रि का पर्व आज फाल्गुन कृष्ण त्रयोदशी युक्त चतुर्दशी में उत्तराषाढ़ा एवं श्रवण नक्षत्र के युग्म संयोग के साथ व्यतिपात योग, सर्वार्थ सिद्धि योग एवं जयद् योग में मनाया जा रहा है। इस पर्व को लेकर मंदिर एवं शिवालयों को कई तरह के पत्र, पुष्प, झंडा, पताका एवं आकर्षक बल्बों से सजाया गया है।श्रद्धालु सुबह से ही भगवान शिव के मंदिरों में उमड़ रहे हैं। माना जाता है कि आज शिवलिंग पर जल, दूध, बेलपत्र, बेर आदि चढ़ाने से भगवान शिव की कृपा मिलती है तथा मनोकामनाएं पूरी होती हैं। बिहार के सभी मंदिर 'हर-हर महादेव' उद्घोष से गुंजायमान हैं।
महाशिवरात्रि को लेकर मंदिरों में पूजन, जलाभिषेक, रूद्राभिषेक के लिए खास इंतजाम किए गए हैं। राजधानी पटना में देर रात से ही ग्रामीण क्षेत्रों से बड़ी संख्या में लोगों के आने का सिलसिला शुरू हो गया, जो अभी तक जारी है। सुबह होते ही श्रद्धालुओं ने नदियों और तालाब में स्नान करने के बाद मंदिरों के बाहर लंबी कतार लगाकर बाबा भोलेनाथ के दर्शन कर रहे हैं।शिवालयों में शिव भक्तों की कतार लगी है। श्रद्धालु गंगाजल, संगम जल, दूध-दही, मधु, पंचामृत, चंदन, भस्म, फूलमाला, बेलपत्र, धतूरा, भांग, इत्र, अभ्रक, ऋतुफल, मिष्ठान एवं पान-सुपारी से शिव की पूजा कर रहे हैं। घरों में नर्मदेश्वर शिवलिंग, स्फटिक शिवलिंग, पार्थिव शिवलिंग की विधि-विधान से पूजा हो रही है। मंदिरों में पूरे दिन जलाभिषेक, रुद्राभिषेक के बाद संध्या बेला में शिव श्रृंगार होगा। पटना में छोटे-बड़े सभी शिवालयों को फूलों से सजाया गया है और आकर्षक ढंग से रोशनी की व्यवस्था की गई है।पटना में खाजपुरा शिव मंदिर में इसके लिए खास इंतजाम किए गए हैं।
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