पटना , अप्रैल 07 -- बिहार के पुलिस महानिदेशक विनय कुमार ने आपराधिक मामलों में वैज्ञानिक जांच की बढ़ती भूमिका पर ज़ोर देते हुए मंगलवार को कहा कि अगले एक से दो साल में बिहार में नौ और विधि विज्ञान प्रयोगशाला (एफएसएल) कार्यरत हो जाएंगे। डीजीपी विनय कुमार मंगलवार को राज्य विधि विज्ञान प्रयोगशाला, सीआईडी पटना द्वारा विधि विज्ञान सेवा निदेशालय (डीएफएसएस) और केन्द्रीय गृह मंत्रालय के संयुक्त तत्वाधान में आयोजित दो दिवसीय "सैटेलाइट कॉन्फ्रेंस ऑन बायोलॉजिकल साइंसेज" को संबोधित करते हुए कहा कि फिलहाल में बिहार में चार क्षेत्रीय विधि प्रयोगशाला (एफएसएल) कार्यरत हैं। उन्होंने कहा कि अभी राज्य में 4 एफएसएल काम कर रहे हैं। ये चारों एफएसएल पटना, मुजफ्फरपुर, भागलपुर और राजगीर स्थित बिहार पुलिस अकादमी में स्थापित हैं। नौ और क्षेत्रीय एफएसएल की बिल्डिंग बनकर तैयार है। इसके अलावा, 102 असिस्टेंट डायरेक्टर और सीनियर साइंटिफिक असिस्टेंट की नियुक्ति की प्रक्रिया भी पूरी हो चुकी है।

इस कॉन्फ्रेंस में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के विशेषज्ञ, देश के सभी राज्यों के एफएसएल और केन्द्रीय एफएसएल के वैज्ञानिक और अन्य विशेषज्ञ इस वर्कशॉप में हिस्सा ले रहे हैं।

डीजीपी विनय कुमार ने कहा कि भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) के पारित होने के बाद आपराधिक वारदातों की वैज्ञानिक जांच की भूमिका काफी बढ़ गयी है। उन्होंने कहा कि राज्य में पिछले दो दशकों में बड़े पैमाने पर विधि विज्ञान की बुनियादी सुविधाओं का विकास हुआ है।उन्होंने कहा, " हम वर्ष 2012-13 में मुश्किल से 700 से 800 मामलों में ही एफएसएल की सेवा उपलब्ध करा पाते थे, लेकिन अब हम 18,000 आपराधिक मामलों में विधि विज्ञान प्रयोगशाला की सेवाएं उपलब्ध करा रहे हैं। तब राज्य में विधि विज्ञान प्रयोगशाला में वैज्ञानिकों की संख्या महज दो अंकों में ही थी। "उन्होंने कहा कि पॉक्सो के मामलों में डीएनए की जांच अब ज़रूरी कर दी गई है और राज्य में सिर्फ़ एक डीएनए लैब उपलब्ध है जो ज़रूरतों को पूरा करने में असमर्थ है।

श्री कुमार ने कहा कि राज्य के कुल 28 जिलों में डिस्ट्रिक्ट मोबाइल लैबोरेटरीज के लिए भवन निर्माण का काम पूरा हो चुका है। वैज्ञानिकों की नियुक्ति के बाद उन्हें चालू कर दिया जाएगा।

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