, March 18 -- श्री अमृत ने बताया कि इस तरह की कार्यशाला बिहार में पहली बार आयोजित की जा रही है। इसमें देश के लगभग 20 राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। इसका उद्देश्य एसडीजी मॉनिटरिंग फ्रेमवर्क को सुदृढ़ करना, इंडिकेटर आधारित प्रगति की प्रभावी ट्रैकिंग सुनिश्चित करना तथा राज्यों की सांख्यिकीय क्षमता को सशक्त बनाना है। इसके अंतर्गत विशेष रूप से डेटा गैप की पहचान, डेटा गुणवत्ता में सुधार तथा प्रशासनिक एवं सर्वेक्षण आधारित आंकड़ों के एकीकरण पर बल दिया जा रहा है, जिससे नीति निर्माण के लिए विश्वसनीय एवं अद्यतन डेटा उपलब्ध हो सके। कार्यक्रम में पर्यावरणीय लेखांकन को भी प्रमुखता दी गई। इसके माध्यम से प्राकृतिक संसाधनों के उपयोग, संरक्षण एवं पर्यावरणीय प्रभावों का आकलन कर विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन स्थापित करने की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं। इसी क्रम में जेंडर सांख्यिकी को सुदृढ़ करने पर भी बल दिया गया ताकि महिलाओं एवं पुरुषों के बीच असमानताओं को डेटा के माध्यम से बेहतर समझकर लैंगिक-संवेदनशील एवं समावेशी नीतियों का निर्माण किया जा सके।

सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय के सचिव डॉ. सौरभ गर्ग ने कहा कि 'एसडीजी इंडिकेटर्स की प्रभावी मॉनिटरिंग के लिए मजबूत सांख्यिकीय प्रणाली, डेटा गुणवत्ता में सुधार तथा राज्यों के बीच सहयोग अत्यंत आवश्यक है। यह कार्यशाला इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

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