, April 13 -- इस संबंध में श्रमायुक्त ने सुझाव दिया कि श्रम संसाधन एवं प्रवासी श्रमिक कल्याण विभाग की तरफ से एनजीओ के साथ समन्वय स्थापित करने के लिए कार्यशाला आयोजित किया जाना है, जिससे विमुक्त कराए गए बाल श्रमिकों को तत्काल सहायता राशि उपलब्ध कराने तथा सीएलटीएस पोर्टल में उनके नाम दर्ज करने के बीच होने वाले अंतराल को कम किया जा सके। श्रमायुक्त ने जानकारी दी कि बंधुआ मजदूरों एवं बाल श्रमिकों के पुनर्वास की समीक्षा के लिए बिहार के मुख्य सचिव की अध्यक्षता में एक कार्ययोजना संचालित है, जिसके अंतर्गत संबंधित विभागों की ओर से किए जा रहे पुनर्वास कार्यों की नियमित समीक्षा की जाती है। साथ ही जिला, प्रखण्ड एवं पंचायत स्तर पर टास्क फोर्स का गठन किया गया है, जिसकी नियमित बैठकें आयोजित की जाती हैं।
बैठक के दौरान यह भी बताया गया कि बाल श्रमिकों को बाल कल्याण समिति के समक्ष प्रस्तुत किए जाने के बाद उन्हें इनटाइटेलमेंट कार्ड प्रदान किया जाता है, जो ऑनलाइन पोर्टल पर भी उपलब्ध है। उन्होंने निर्देश दिया है कि इनटाइटेलमेंट कार्ड बच्चों के अभिभावकों को भी उपलब्ध कराया जाए। इसके अतिरिक्त नियोजकों से दंड स्वरूप वसूल की जाने वाली राशि के प्रभावी उपयोग के लिए एक स्पष्ट रोडमैप तैयार करने का भी निर्देश दिये गये।
बैठक में बाल श्रम उन्मूलन, विमुक्त बाल श्रमिकों के पुनर्वास तथा विभागीय समन्वय को और सुदृढ़ बनाने पर विशेष बल दिया गया। बैठक में संयुक्त श्रमायुक्त विजय कुमार के साथ विभाग और बिहार राज्य बाल श्रमिक आयोग के वरीय पदाधिकारी उपस्थित थे।
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