, March 19 -- मंत्री ने कहा कि सहकारिता के माध्यम से सब्जी, दुग्ध, शहद एवं मत्स्य उत्पादन के क्षेत्र में व्यापक विस्तार की संभावनाएं हैं, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि सहकारिता संस्थाओं को बहुउद्देशीय बनाकर गांवों में बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन सुनिश्चित किया जा सकता है। 'श्री अन्न' जैसे मरुआ, बाजरा आदि के उत्पादन को भी बढ़ावा देने की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि ये फसलें न केवल पोषण की दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं, बल्कि जलवायु अनुकूल कृषि के लिए भी अत्यंत उपयोगी हैं।
मंत्री डा. कुमार ने राज्य के किसानों से अपील किया कि वे मिट्टी की जांच के आधार पर फराल चयन करें, जिससे उत्पादन लागत में कमी लाते हुए अधिकतम उपज एवं आय सुनिश्चित की जा सके।
सहकारिता विभाग के निबंधक रजनीश कुमार सिंह ने कहा कि बिहार में 8463 पैक्स हैं, जिसमें 1.39 करोड़ सदस्य जुड़े हैं। यह संख्या हमारी आबादी का 10 प्रतिशत से ज्यादा है। इन्हें व्यवसायिक गतिविधियों से जोड़ा जाए तो आने वाले समय में बिहार की तस्वीर बदली जा सकती है। पैक्सों के जरिए प्रयास किया जा रहा है कि गांव के लोगों को गांव में ही रोजगार मिले। इस कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य पैक्स को सुदृढ बनाकर किसानों की आय में वृद्धि एवं कृषि एवं गैर कृषि आधारित उद्यमों को प्रोत्साहन देना है।
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