, March 31 -- दरभंगा की पहचान तालाबों से ही है। गांव की बातें तो दूर, शहर में आज भी हराही, दिग्घी, गंगासागर, सुक्खी दिग्घी, आनंदबाग दिग्घी, मिर्जा खान तालाब, लक्ष्मीसागर, लालपोखर आदि कई तालाब मौजूद हैं। सभी का इतिहास सदियों पुराना है। राजा नरेंद्र सिंह ने छोटे-बड़े सैकड़ों तालाब की खुदाई कराई। दरभंगा शहर में एक ही श्रृंखला में स्थित तीन प्रमुख तालाबों में दिग्घी तालाब सबसे बड़ा है। सरकारी अभिलेखों के अनुसार यह 112 बीघा 10 कट्ठा क्षेत्र में फैला है। इसका निर्माण 1288 ई० से 1303 ई० के बीच शासन करने वाले राजा श शक्र देव सिंह द्वारा कराया गया था। वर्तमान में अतिक्रमण के कारण इसका क्षेत्रफल काफी सिमट गया है।

दिग्घी तालाब के ठीक दक्षिण में गंगासागर पोखर स्थित है, जो 78 बीघा दो कट्ठा 10 धूर क्षेत्र में फैला हुआ है। इस तालाब की खुदाई 1136 ई० से 1148 ई० के बीच शासन करने वाले राजा गंगदेव सिंह द्वारा कराई गई थी, लेकिन वर्तमान में यह भी चारों ओर से अतिक्रमण की चपेट में है।

दिग्घी के उत्तर में हराही तालाब स्थित है, जो तीनों में क्षेत्रफल की दृष्टि से सबसे छोटा है। यह 62 बीघा 10 कट्ठा क्षेत्र में फैला है। इसका निर्माण 1303 ई० से 1324 ई० के बीच शासन करने वाले हरि सिंह देव द्वारा कराया गया था।

इस तालाब का भी पूरब एवं दक्षिण भाग में काफी दूर तक लोगों द्वारा अतिक्रमण कर कब्जा कर लिया गया है।हालांकि, तालाब बचाओ अभियान समिति, नदी वापसी अभियान समिति, जिला ग्राम स्वराज अभियान समिति आदि के कार्यकर्ता इसे बचाने के लिए रात दिन कार्य कर रहे हैं।

दरभंगा की ऐतिहासिक पहचान से जुड़े ये तालाब अब विकास बनाम संरक्षण की बहस के प्रतीक बनते जा रहे हैं, और सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि न्यायिक हस्तक्षेप के बाद आगे की दिशा क्या तय होती है।

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