, March 24 -- जीविका से सम्बद्ध गतिविधियों के संचालन में लगी विभिन्न विधा यथा संस्था निर्माण एवं क्षमतावर्धन, वित्तीय समावेशन, सामाजिक विकास, सतत् जीविकोपार्जन योजना, कृषि, गैर-कृषि, पशुधन, जीविका स्किल्स, स्वास्थ्य, पोषण एवं स्वच्छता, लोहिया स्वच्छ बिहार अभियान, जल-जीवन-हरियाली अभियान, मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना के स्टॉल पर राज्य के विकास में जीविका दीदियों के योगदान को परिलक्षित किया गया। देशी एवं पौष्टिक व्यंजन बनाने व बिक्री के हुनर को भी जीविका दीदियों ने व्यंजन मेला परिसर में पांच स्टॉल पर प्रदर्शित किया। यहाँ 'दीदी की रसोई के स्टॉल पर आगंतुकों ने सुस्वादु व्यंजनों का लुत्फ उठायाबिहार में शराबबंदी के बाद नीरा के उत्पादन को प्रोत्साहन और फिर उससे जुड़े परिवारों की आर्थिक एवं सामाजिक दिशा में हुई बढ़ोतरी भी प्रदर्शित हुई। राज्य सरकार की एवं जीविका की ओर से संचालित सतत जीविकोपार्जन योजना की सफलता की गाथा भी खुद इससे लाभान्वित हुई महिलाओं ने सुनाई। इस स्टॉल पर विलुप्त हुई सिक्की कला, बम्बू कला और लाह की चूड़ियों के पुनर्जीवित होने और उन्हें प्रोत्साहन के साथ ही बड़ा बाज़ार उपलब्ध होने की प्रक्रिया भी दिखी। हर घर की एक महिला को आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से बिहार में शुरू की गई मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना से जुड़कर महिलाओं में आई आत्मनिर्भरता भी प्रदर्शित हुई। जीविका पवेलियन के थीम एरिया में जीविका दीदियों द्वारा चूड़ी, बांस, सिक्की से कलाकृतियों, एवं मधुबनी पेंटिंग का जीवंत निर्माण एवं बिक्री सह प्रदर्शनी हुई। मधुबनी पेंटिंग से बनी चूड़ियाँ आगंतुकों को खूब भाया और उसकी बिक्री भी हुई।

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