, March 13 -- ग्रामीण विकास विभाग के पदाधिकारियों का कहना है कि अभियान के तहत राज्य में इन तालाब और पोखरों के जीर्णोद्धार के सहारे भूजल स्तर में वृद्धि, सिंचाई क्षमता में सुधार, और अतिक्रमित जल स्रोतों को मुक्त कराया जा रहा है। जल संचयन संरचनाओं को पुनर्जीवित करने से ग्रामीण क्षेत्रों की पारिस्थितिकी और कृषि को मजबूती मिलेगी।
ग्रामीण विकास विभाग के अनुसार जल-जीवन-हरियाली अभियान के तहत औरंगाबाद जिले में अभी तक 1675 नए जल संचयन संरचनाओं का निर्माण किया गया है। इसमें सबसे अधिक 2019-20 में 1069, 2023-24 में 205, 2022-23 में 151, 2020-21 में 118, 2021-22 में 87 तो 2024-25 में 45 तालाब और पोखरों का निर्माण किया गया।
औरंगाबाद के पतेया निवासी उदय प्रसाद ने बताया कि गांव में उपलब्ध दशकों पुराना पोखर हमेशा सूखा रहता था। उड़ाही नहीं किए जाने की वजह से पोखर में जल ठहराव नहीं होने की समस्या थी। गांव में जलस्रोत के नहीं होने से चापाकल और सिंचाई का ट्यूबवेल भी फेल्योर हो गया था। हाल के कुछ वर्ष पहले पोखर का जीर्णोंधार किए जाने से गांव के लोगों की कई सुविधाएं बढ़ गई हैं। मौजूदा समय में पोखर से जहां किसानों को सिंचाई के लिए पर्याप्त जल की उपलब्धता बनी रहती है वहीं दूसरी ओर पशु-पक्षियों के पीने के लिए पानी भी मिल जाता है।
पतेया के ही पंकज कुमार का मानना है कि पोखर की उड़ाही और दूसरे विकास कार्य किए जाने का लाभ आज गांव में करीब डेढ़ हजार लोग उठा रहे हैं। पोखर का सौंदर्यीकरण किए जाने के बाद यहां सुबह-शाम लोगों के लिए टहलने की सुविधा उपलब्ध हो गई है। साथ ही भूगर्भ जलस्तर में भी तेजी से सुधार आया है। गर्मी के दिनों में पशु-पक्षियों के लिए यह पोखर अब वरदान साबित होगा।
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