, Feb. 17 -- श्री तिवारी ने कहा कि इस समय ग्रामीण इलाकों में भी लगातार बिजली उपलब्ध है और वहां विद्युत शवदाह गृह बना कर इसका समाधान किया जा सकता है। सदन में उपस्थित विधायकों ने भी श्री तिवारी का समर्थन किया और कहा कि गरीब लोगों के लिए लकड़ियां खरीदना संभव नही होता है और बहुत से लोग गोबर के कंडे (गोंयठे) से शव जला रहे हैं।
इसके जवाब में पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में विद्युत शवदाह गृह बनाने की राज्य सरकार की तरफ से कोई योजना नही है। उन्होंने कहा कि पन्द्रहवें केंद्रीय वित्तीय आयोग से मिले अनुदान के प्रयोग से पंचायत इसका निर्माण कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि विधायक भी इसमें पहल कर सकते हैं।
इस दौरान विधायक मिथिलेश तिवारी ने शवदाह के विषय पर सरकार की उदासीनता की बार की ओर ध्यान दिलाया कि उन्होंने नमामि गंगे योजना के तहत बैकुंठपुर प्रखंड के डुमरिया घाट पर दो शवदाह गृह बनाने के लिए 2020 में केंद्र से मंजूरी दिलाई थी, लेकिन पांच साल हो गए और निर्माण गंगा अर्बन डेवलोपमेंट कम्पनी लिमिटेड (गुडको) के अधिकारियों की फाइलों में घूम रहा है। श्री तिवारी ने कहा कि प्रदेश में शवदाह नदियों के घाट पर किये जाने का रिवाज है और सरकार को चाहिए कि नगरों और ग्रामीण इलाकों में नदियो के किनारे शवदाह गृह का निर्माण करे। उन्होंने कहा कि विधायको को मिलने वाली प्रति वर्ष चार करोड़ की राशि इतनी नही है कि इस तरह की योजनाओं पर काम किया जाए। उन्होंने कहा कि सरकार यदि चाहती है कि इस समस्या का समाधान विधायक निकालें, तो उनकी निधि बढ़ा दी जाए।
इस बीच उपमुख्यमंत्री विजय सिन्हा ने पुनः जवाब दिया और कहा कि सरकार इस समस्या के प्रति सचेत है और नगरी इलाकों मेँ विद्युत शवदाह गृह बनाने के साथ ग्रामीण इलाकों में भी इसे बनाने की योजना पर विचार किया जा रहा है। श्री सिन्हा के जवाब के बाद विधानसभा अध्यक्ष प्रेम कुमार ने कहा कि पंचायती राज विभाग इनकी समीक्षा करेगा और ग्रामीण इलाकों में विद्युत शवदाह गृह के निर्माण पर फैसला लेगा।
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